फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi high court issues notice to delhi govt and others on pil seeking ban on unnecessary sex-selective surgeries on infants

सुनवाई: 'सिर्फ गंभीर हालात में ही हो बच्चों की लिंग संबंधी सर्जरी', याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को भेजा नोटिस

Wed, 25 Aug 2021 01:14 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 25 Aug 2021 01:14 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार व अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है।

विज्ञापन
Delhi high court issues notice to delhi govt and others on pil seeking ban on unnecessary sex-selective surgeries on infants
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने जीवन के लिए खतरनाक स्थितियों को छोड़कर इंटरसेक्स (मध्यलिंगी) शिशुओं और बच्चों पर चिकित्सकीय रूप से अनावश्यक लिंग-चयनात्मक सर्जरी पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली याचिका पर दिल्ली सरकार व दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) से जवाब मांगा है। 

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोनों पक्षों को इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 11 अक्तूबर तय की है। यह जनहित याचिका सृष्टि मदुरै एजुकेशनल रिसर्च फाउंडेशन द्वारा दायर की गई है। याचिका में दिल्ली सरकार और डीसीपीसीआर को इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।
विज्ञापन


अधिवक्ता रॉबिन राजू, यश प्रकाश और दीपा जोसेफ के माध्यम से दायर याचिका में शिशुओं और बच्चों पर सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिका में राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएलएसए) बनाम भारत सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी को भी अपनी लिंग पहचान की कानूनी मान्यता के लिए एक आवश्यकता के रूप में मेडिकल प्रक्रियाओं से गुजरने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। याचिका में कहा गया है कि यह मुद्दा अत्यधिक महत्व का है, क्योंकि यह मानव अधिकारों और मानव की शारीरिक अखंडता से संबंधित है।

याचिका में कहा गया है कि सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी या मेडिकल रूप से अनावश्यक सामान्य सर्जरी के मुद्दे का इंटरसेक्स लोगों के दिमाग पर लंबे समय तक चलने वाला भारी मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है और उन्हें भविष्य में मेडिकल ट्रीटमेंट कराने से भी रोकता है। 

याचिका में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया गया है जिसमें राज्य सरकार को इंटरसेक्स शिशुओं और बच्चों पर सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी पर प्रभावी रूप से प्रतिबंध लगाने के लिए कहा गया था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed