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दिल्ली हाईकोर्ट: अदालत ने नेहा बोरा की याचिका की खारिज, बॉन्ड भरने के लिए जारी किए नोटिस के खिलाफ दी थी अर्जी
Fri, 23 Oct 2026 07:15 PM IST
Akash Dubey
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: Akash Dubey
Updated Fri, 23 Oct 2026 07:15 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। नेहा ने यह याचिका बॉन्ड भरने के लिए जारी किए गए नोटिस को चुनौती देते हुए दायर की थी।
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नेहा बोरा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने नेहा की याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 130 के तहत शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने के लिए जारी किए गए नोटिस को चुनौती देते हुए दायर की गई थी। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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यह था मामला
नेहा बोरा को 16 अक्तूबर को मंडी हाउस में एक सभा में शामिल होने के दौरान हिरासत में लिया गया था। उनका आरोप है कि उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाकर आरके पुरम थाने में रातभर रखा गया और अगले दिन सुबह छह बजे रिहा किया गया। नोटिस में मंडी हाउस पर नारेबाजी, निषेधाज्ञा के बावजूद जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शन और कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के लिए लोगों को उकसाने के आरोप लगाए गए हैं। नेहा बोरा ने याचिका में कहा है कि नोटिस में शांति भंग होने की आशंका के समर्थन में कोई ठोस कारण, विशिष्ट घटना या समयावधि नहीं बताई गई है।
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गुरुवार को सुनवाई के दौरान नेहा बोरा ने दी यह दलील
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को स्पष्ट रूप से कहा कि वह सीजेपी की ओर से कनॉट प्लेस में राष्ट्रीय झंडा फहराने वाले प्रदर्शन से जुड़ी नहीं थीं। उनकी ओर से यह दावा किया गया कि 16 अक्तूबर को उन्होंने खुद ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया था और सीजेपी के आह्वान में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि देश में तिरंगा फहराने के लिए उन्हें किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
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