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दिल्ली हाईकोर्ट: पीड़िता से समझौता नहीं हो सकता दुष्कर्म मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने का आधार, नहीं हो सकते आरोप हल्के
Sat, 09 Apr 2022 04:57 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Sat, 09 Apr 2022 04:57 PM IST
सार
अदालत ने कहा कि दुष्कर्म के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं और इन्हें आकस्मिक तरीके से नहीं लिया जा सकता। आरोप है कि आरोपी सितंबर 2021 में शिकायतकर्ता के घर आया था जब उनके बीच विवाद हुआ और उसने पीड़िता से दुष्कर्म किया।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िता से समझौते के आधार पर आरोपी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा दुष्कर्म समाज के खिलाफ एक अपराध है और समझौते के आधार पर आरोपों को हल्केपन से नहीं लिया जा सकता। अदालत ने कहा दुष्कर्म का अपराध न केवल पीड़िता के व्यक्तित्व को नष्ट कर देता है बल्कि पीड़िता के मानसिक मानस को भी झकझोर देता है जो वर्षों तक पीड़िता के मन में समाया रहता है।
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न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर ने कहा कि यह तथ्य कि शिकायतकर्ता पीड़िता मुकर गई दुष्कर्म के आरोप को माफ नहीं किया जा सकता। यह जघन्य अपराध है और पीड़ित के व्यक्तित्व को नष्ट और उसके मानस को खराब कर देता है। वहीं केवल एक समझौता करने से आरोपों को कम नहीं किया जा सकता है न अपराध की गंभीरता कम होती है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दुष्कर्म का कृत्य किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि समाज के खिलाफ अपराध है।
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अदालत ने कहा पुलिस स्टेशन महेंद्र पार्क में दर्ज प्राथमिकी दुष्कर्म के आरोपों के साथ होने वाली आपराधिक कार्यवाही को धारा 482 सीआरपीसी के तहत इस न्यायालय में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए रद्द नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा दी गई एनओसी के आधार पर आरोपी के अपराध को माफ नहीं किया जा सकता।
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अदालत ने कहा सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार निर्देश दिया है कि उच्च न्यायालय को सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल दुष्कर्म के अपराध को रद्द करने के लिए नहीं करना चाहिए। दुष्कर्म का अपराध न केवल पीड़िता के व्यक्तित्व को नष्ट कर देता है बल्कि पीड़िता के मानसिक मानस को भी झकझोर देता है जो वर्षों तक पीड़िता के मन में समाया रहता है।
अदालत ने कहा कि दुष्कर्म के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं और इन्हें आकस्मिक तरीके से नहीं लिया जा सकता। आरोप है कि आरोपी सितंबर 2021 में शिकायतकर्ता के घर आया था जब उनके बीच विवाद हुआ और उसने पीड़िता से दुष्कर्म किया। याची के वकील ने बताया कि शिकायतकर्ता मुकर गई है और वह अब मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। उन्होंने कहा कि उनके बीच स्थापित शारीरिक संबंध सहमति से थे। ऐसे में प्रथमिकी रद्द की जाए।