केंद्र के साथ मिलकर ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के लिए कानून बनाए दिल्ली सरकार : HC
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दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के संबंध में स्पष्ट नीति बनाने को कहा है। बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि इस नीति को स्वीकृति के लिए एलजी को जरूर भेजा जाए।
साथ ही कोर्ट ने ऐप आधारित कैब सेवा देने वाली टैक्सियों को हिदायत दी है कि वो मीटर से ही चलें और सरकार द्वारा निर्धारित किराया ही वसूलें। सरकार द्वारा निर्धारित किराए के अलावा उन्हें किसी प्रकार का सरचार्ज वसूल करने का अधिकार नहीं है।
बता दें कि मंगलवार को ही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि ऐप आधारित सेवाओं को नियंत्रित करने के लिए एक स्पष्ट और आदर्श नीति का निर्माण किया जाना चाहिए। इससे न सिर्फ लोगों को सुविधा मिलेगी बल्कि, किराए को लेकर लोगों में फैली भ्रांति भी समाप्त होगी।
11 अगस्त तक सुझाएं पैनल का नाम
जस्टिस मनमोहन ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली और केंद्र सरकार के दो अधिकारियों की ऐसी कमेटी का गठन किया जाना चाहिए जो सभी प्रभावित पक्षों से बात करे जिसमें ऐप आधारित कैब सेवा प्रदाता, रेडियो टैक्सी और उपभोक्ताओं की बात सुनने के बाद आदर्श कानून का निर्माण किया जा सके।
कोर्ट ने दोनों ही सरकारों को 11 अगस्त तक अपने नामों को सुझाने का का समय दिया है ताकि इससे संबंधित कानून के निर्माण के लिए पैनल का निर्माण किया जा सके।
इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पैनल के द्वारा निर्मित आदर्श कानून के मुताबिक ही ऐप आधारित कंपनियों को अपने रेट निर्धारित करने चाहिए।
बता दें कि दिल्ली में ऐप आधारित कैब सेवा प्रदान करने वाली ओला और ऊबर जैसी कंपनियों ने शपथ पत्र दायर कर कोर्ट को बताया था कि उनके द्वारा सरकार द्वारा निर्धारित किराया ही यात्रियों से वसूला गया है।