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Delhi NCR News: दिल्ली स्वास्थ्य मंत्री ने दवा खरीद में देरी पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव को जारी किया नोटिस
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नई दिल्ली। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को दवाओं, उपभोग्य सामग्रियों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में लंबित मामलों का एक्शन प्लान समय पर न भेजने पर नोटिस जारी किया है। मंगलवार को जारी नोटिस के अनुसार, मंत्री ने 26 मई, 17 जून और 22 जुलाई को तीन पत्र भेजकर आइटम-वाइज समय सीमा सहित पूरा एक्शन प्लान मांगा था, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
नोटिस में कहा गया है कि बार-बार निर्देशों का पालन न करने से जरूरी खरीद की निगरानी प्रभावित हो रही है, जिससे जन स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है। सचिव से पूछा गया है कि निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आचार नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
नोटिस में सचिव को बुधवार तक जवाब और रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। ब्यूरो
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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। यह नोटिस दवाओं, उपभोग्य सामग्रियों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में लंबित मामलों का पूरा प्लान समय पर नहीं भेजने के कारण दिया गया है। मंगलवार को जारी नोटिस में कहा गया कि मंत्री ने 26 मई को विभाग को आधिकारिक पत्र भेजकर कहा था कि सभी लंबित खरीद का पूरा एक्शन प्लान तैयार कर भेजें। इसमें हर सामान के लिए समय सीमा भी बताई जाए। साथ ही, स्वास्थ्य संस्थानों से मांग आने के समय की भी समीक्षा की जाए। जब कोई जवाब नहीं आया तो 17 जून को फिर पत्र भेजा गया और 19 जून तक प्लान व रिपोर्ट मांगी गई। इसके बाद भी जानकारी नहीं मिली तो 22 जुलाई को तीसरी बार याद दिलाई गई। लेकिन, अब तक आइटम-वाइज समय सीमा वाला कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया।
वहीं, नोटिस में कहा गया है कि बार-बार निर्देशों का पालन न करने से जरूरी खरीद की निगरानी प्रभावित हो रही है। इससे जन स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है। सचिव से पूछा गया है कि बार-बार निर्देश क्यों नहीं माने गए और एक्शन टेकेन रिपोर्ट क्यों नहीं भेजी गई। साथ ही, यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आचार नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। ऐसे में नोटिस में सचिव को बुधवार तक जवाब और एक्शन टेकेन रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। इसमें गैर-पालन के कारण और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने के उपाय बताने होंगे। अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।
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नोटिस में कहा गया है कि बार-बार निर्देशों का पालन न करने से जरूरी खरीद की निगरानी प्रभावित हो रही है, जिससे जन स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है। सचिव से पूछा गया है कि निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आचार नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
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नोटिस में सचिव को बुधवार तक जवाब और रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। ब्यूरो
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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। यह नोटिस दवाओं, उपभोग्य सामग्रियों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में लंबित मामलों का पूरा प्लान समय पर नहीं भेजने के कारण दिया गया है। मंगलवार को जारी नोटिस में कहा गया कि मंत्री ने 26 मई को विभाग को आधिकारिक पत्र भेजकर कहा था कि सभी लंबित खरीद का पूरा एक्शन प्लान तैयार कर भेजें। इसमें हर सामान के लिए समय सीमा भी बताई जाए। साथ ही, स्वास्थ्य संस्थानों से मांग आने के समय की भी समीक्षा की जाए। जब कोई जवाब नहीं आया तो 17 जून को फिर पत्र भेजा गया और 19 जून तक प्लान व रिपोर्ट मांगी गई। इसके बाद भी जानकारी नहीं मिली तो 22 जुलाई को तीसरी बार याद दिलाई गई। लेकिन, अब तक आइटम-वाइज समय सीमा वाला कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया।
वहीं, नोटिस में कहा गया है कि बार-बार निर्देशों का पालन न करने से जरूरी खरीद की निगरानी प्रभावित हो रही है। इससे जन स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है। सचिव से पूछा गया है कि बार-बार निर्देश क्यों नहीं माने गए और एक्शन टेकेन रिपोर्ट क्यों नहीं भेजी गई। साथ ही, यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आचार नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। ऐसे में नोटिस में सचिव को बुधवार तक जवाब और एक्शन टेकेन रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। इसमें गैर-पालन के कारण और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने के उपाय बताने होंगे। अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।