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दूसरी CAG रिपोर्ट में खुलासा: फंड का पैसा नहीं किया खर्च, दवा-स्टाफ-उपकरण का अभाव; मोहल्ला क्लीनिक पर भी सवाल

Fri, 28 Feb 2025 08:38 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Fri, 28 Feb 2025 08:38 PM IST
सार

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा में दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सीएजी रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया कि कोरोना महामारी के दौरान आपदा से निपटने के लिए केंद्र सरकार से मिले फंड का बड़ा हिस्सा भी दिल्ली सरकार खर्च नहीं कर पाई। रिपोर्ट में मोहल्ला क्लीनिक परियोजना पर भी सवाल उठाए गए हैं। 

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delhi health CAG report Lack of medicines staff and equipment  with questions on Mohalla Clinic
दिल्ली हेल्थकेयर की कैग रिपोर्ट में बड़े खुलासे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधा आईसीयू में पहुंच गई हैं। यहां के अस्पतालों, मोहल्ला क्लीनिक में पर्याप्त जरूरी दवाएं, जांच के उपकरण, डॉक्टर, पानी-शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं सहित दूसरी आवश्यक सेवाएं नहीं हैं। मरीजों को सर्जरी के लिए 10 माह तक का इंतजार करना पड़ रहा है। कई विभागों में डॉक्टर न होने के कारण सुविधाएं तक शुरू ही नहीं हो पाई। इसका खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट से हुआ है।

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रिपोर्ट में मोहल्ला क्लीनिक परियोजना पर भी सवाल उठाए गए हैं। जबकि आम आदमी पार्टी की सरकार ने इस योजना को विश्व स्तरीय बताकर पूरे देश में प्रचार किया था। रिपोर्ट में कहा गया कि 74 मोहल्ला क्लीनिकों की समीक्षा में पाया गया कि किसी में भी सभी 165 आवश्यक दवाओं का पूरा स्टॉक नहीं था। इसके अलावा पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर, एक्स-रे व्यूअर, थर्मामीटर और ब्लड प्रेशर मॉनिटर सहित दूसरे आवश्यक उपकरण भी नहीं थे।

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रिपोर्ट में कहा गया कि अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 के बीच मोहल्ला क्लीनिकों में जाने वाले करीब 70 फीसदी मरीज डॉक्टर के पास एक मिनट से भी कम समय बिताते हैं। इसमें पाया गया कि दिल्ली के चार चयनित जिलों में 218 मोहल्ला क्लीनिकों में से 41 डॉक्टरों के इस्तीफा देने, छोड़ने या विस्तारित छुट्टी पर रहने के कारण 15 दिनों से लेकर करीब दो साल तक की अवधि के लिए बंद रहे। इसके अलावा, 31 मार्च, 2017 तक 1,000 मोहल्ला क्लीनिक खोलने के लक्ष्य के मुकाबले 31 मार्च, 2023 तक केवल 523 ही चालू थे।

रिपोर्ट में कहा गया कि जांच की गई अस्पतालों में मैनपावर की कमी के कारण ऑपरेशन थियेटर का उपयोग नहीं किया जा रहा था। इन अस्पतालों में सर्जरी के लिए औसत प्रतीक्षा समय एक से 10 महीने तक था। साथ ही यहां गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) सेवाओं कमी पाई गई। लोक नायक अस्पताल के मेडिसिन विभाग की आईसीयू में मार्च 2020 तक 12 में से पांच ईसीजी मशीनें काम नहीं कर रही थीं। जुलाई 2020 में एक मशीन गायब हो गई और फरवरी 2021 में मामला दर्ज किया गया, लेकिन अस्पताल ने कोई और विवरण नहीं दिया गया।

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अस्पतालों में स्टाफ का अभाव
दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग स्टाफ की 21 फीसदी कमी और प्रमुख अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की गंभीर कमी मिली। दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल (34 फीसदी), जीटीबी अस्पताल (28 फीसदी), लोकनायक (20 फीसदी) और भगवान महावीर अस्पताल (33 फीसदी) में रिक्तियां मिली। शिक्षण और गैर-शिक्षण विशेषज्ञों की भारी कमी के कारण सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

दवा की आपूर्ति में हुए फेल
केंद्रीय खरीद एजेंसी 47 फीसदी आवश्यक दवाओं की आपूर्ति करने में विफल रही। इससे अस्पतालों को निजी विक्रेताओं से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं गुणवत्ता परीक्षण में देरी के कारण घटिया दवाओं का भी उपयोग होने का मामला सामने आया।

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नहीं जोड़ पाए बिस्तर
दिल्ली सरकार 2016 से 2021 के बीच केवल 1,357 बिस्तर ही जोड़ पाई। जबकि आम आदमी पार्टी की सरकार की योजना के तहत 10 हजार बिस्तर बढ़ाने थे। दिल्ली में बनाए जा रहे कई अस्पताल परियोजनाओं छह साल तक की देरी से चल रहे हैं। नई स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 15 आवंटित भूखंड अप्रयुक्त हैं। इसके अलावा रिपोर्ट में वित्तीय कुप्रबंधन का मामला भी सामने आया।

फंड का नहीं हो सकता इस्तेमाल
रिपोर्ट में कहा गया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 510.71 करोड़ रुपये अप्रयुक्त रह गए हैं। इसके अतिरिक्त, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए निर्धारित 57 फीसदी से अधिक धनराशि अप्रयुक्त रह गई। भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों के अनुसार अस्पतालों को रोगियों के लिए उचित सुविधाएं नहीं थी। इसमें पीने का पानी, शौचालय सहित दूसरी बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव मिला। लोक नायक में संयुक्त निरीक्षण में पता चला कि इसके नए ओपीडी ब्लॉक में रोगियों और परिचारकों के लिए शौचालयों का अभाव है। चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय के निरीक्षण में पता चला कि भूतल पर केवल एक वाटर कूलर उपलब्ध था, जबकि ओपीडी भी पहली मंजिल पर चल रही थी और शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता था।

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