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खिंचाई करते हुए हाईकोर्ट ने किया सवाल, कहा- बड़े पेड़ की जगह कैसे ले सकता है पौधा?

Wed, 04 Jul 2018 09:48 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो,अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 04 Jul 2018 09:48 PM IST
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Delhi hc says How could saplings replace grown up tree
delhi HC

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कॉलोनियों के पुनर्विकास की परियोजना के तहत दक्षिण दिल्ली इलाके में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित एजेंसियों की खिंचाई की है। पीठ ने सवाल किया कि एक पौधा बड़े पेड़ की जगह कैसे ले सकता है। 16,500 पेड़ों को काटना इस शहर को मरने के लिए छोड़ देने जैसा है। पीठ ने मामले पर संज्ञान लेते हुए 26 जुलाई तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है।

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दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि दिल्ली को इन्हें तोड़ने की जरूरत है तो तोड़ दिया जाएगा, लेकिन पेड़ों को इतनी संख्या में काटकर आप शहर को इस तरह से मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। पीठ ने पूछा कि क्या कार्य शुरू करने से पहले पर्यावरण प्रभाव संबंधी कोई आकलन किया गया था।
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पीठ ने डीडीए से सवाल किया कि हर किसी को लुटियन की दिल्ली में जगह देने की क्या जरूरत है, जब राष्ट्रीय राजधानी में इतनी सारी खाली जमीनें हैं। दिल्ली में भूमिगत जल की कमी होने की दलील पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार से पूछा कि वे उन पौधों की सिंचाई कैसे करेंगे, जिन्हें क्षतिपूरक वनीकरण नीति के तहत बड़े पेड़ों की जगह लगाया जाना है।

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Delhi hc says How could saplings replace grown up tree
cut tree

पीठ ने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि एक बड़े पेड़ की बराबरी 10 पौधे कैसे कर सकते हैं? एक नन्हे पौधे को बड़ा होकर पेड़ बनने में कितना वक्त लगेगा? पीठ ने कहा कि दिल्ली पहले अपने पक्षियों की आबादी को लेकर जानी जाती थी, लेकिन आज स्थिति भिन्न हो गई है। पीठ ने कहा कि इस तरह की आठ मंजिला इमारतों के लिए आप पानी कहां से प्राप्त करेंगे? इन इमारतों से कितनी मात्रा में कूड़ा निकलेगा? यहां पार्किंग की व्यवस्था कहां है और वायु प्रदूषण के बारे में क्या सोचा गया है? आप योजना बनाते समय विवेक का इस्तेमाल नहीं करते।’

वहीं पीठ ने साउथ दिल्ली इलाके के दो बड़े अस्पतालों एम्स और सफदरजंग जाने वाली एंबुलेंस के रास्ते में भी इन इमारतों के निर्माण से बाधा पैदा होने की बात कही। पीठ ने कहा कि इन कॉलोनियों के मुख्य द्वार पर ट्रैफिक जाम लगने से अस्पताल जाने वाले लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी। ऐसे में लोग इन अस्पतालों तक कैसे पहुंचेंगे? इन मुद्दों को लेकर आपने अवश्य ही पर्यावरण प्रभाव आंकलन किया होगा, वह हमें दिखाएं।

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