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दिल्ली सरकार की लंदन और पेरिस की तर्ज पर धूल प्रबंधन की तैयारी
Wed, 04 Aug 2021 01:47 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Wed, 04 Aug 2021 01:47 PM IST
सार
- धूल और प्रबंधन कमेटी ने निर्माणाधीन और विध्वंस स्थलों के लिए जारी की सिफारिश
- उल्लंघन करने पर स्थल को सीज करने की होगी कार्रवाई
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दिल्ली में उड़ती धूल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली सरकार की धूल प्रबंधन कमेटी ने लंदन और पेरिस की तर्ज पर बड़े निर्माणाधीन और विध्वंस स्थलों पर धूल उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए रियल टाइम डस्ट मॉनिटर लगाने की सिफारिश की है। साथ ही धूल उड़ने वाले स्थलों पर पर्यावरण नियमों का सख्ताई से पालन करने के लिए कहा गया है। नियमों की उल्लंघन करने पर तीन लाख से लेकर सीज करने तक की कार्रवाई होगी।
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कमेटी ने उक्त स्थलों पर तकनीक आधारित रियल टाइम निगरानी तंत्र व्यवस्थित करने के साथ भारी जुर्माना भी वसूल करने की सिफारिश की है। कमेटी के मुताबिक, सड़क और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल से दिल्ली के प्रदूषण में 15 से 40 फीसदी पीएम 2.5 तत्व की भागीदारी रहती है।
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कमेटी की सिफारिश लागू होने के बाद दिल्ली की सभी बड़ी निर्मण स्थलों पर रियल टाइम मॉनिटर लगाना होगा। साथ ही लगातार विशलेषण कर उत्सर्जन को लेकर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी(डीपीसीसी) को रिपोर्ट भी सौंपनी होगी। ऐसी जगहों की ओर से डीपीसीसी को एक पूर्व निर्धारित बैंक गारंटी भी देनी होगी।
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साइट पर डीपीसीसी की ओर से समय-समय पर औचक निरीक्षण भी किया जाएगा। मॉनिटर से प्राप्त डाटा को डीपीसीसी द्वारा एक सॉफ्टवेयर की मदद से विशलेषण किया जाएगा। वहीं, उल्लंघन के आधार पर श्रेणीबद्ध तरीके से जुर्माना लगाया जाएगा। यदि तंत्र से कोई छेड़छात्र की जाती है तो इसके लिए डीपीसीसी भारी जुर्माना भी वसूलेगी।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में प्रदूषण की रोकथाम के लिए दिल्ली सरकार ने विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित की थी। इसमें पर्यावरण, दिल्ली संवाद एंव विकास आयोग, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी, आइआइटी दिल्ली, टेरी, डायल, व दिल्ली मेट्रो के से विशेषज्ञों को जोड़ा गया था। कमेटी का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभवों के आधार पर दिल्ली में धूल प्रबंधन को लेकर सिफारिशें देना है।
144 मिनट से अधिक का डाटा नहीं देने पर प्रति मिनट एक हजार रुपये जुर्माना
कमेटी ने चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी साइट पर तंत्र ऑफलाइन पाया जाता है या 24 घंटे के भीतर 144 मिनट से अधिक डाटा नहीं मिला तो प्रतिमिनट एक हजार रुपये का जुर्माना लगेगा।
उल्लंघन करने पर स्थल हो सकता है सीज
प्रदूषण की रोकथाम को लेकर बनाए गए नियमों का उल्लंघन करने पर तीन लाख से लेकर स्थल के सीज होने की कार्रवाई तक झेलने पड़ सकती है। कमेटी ने स्पष्ट किया है कि पीएम 2.5 व पीएम 10 का स्तर नजदीकी मानक केंद्र पर मापी गई मात्रा से 25 फीसदी अधिक होने पर चेतावनी जारी कर तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करने का समय दिया जाएगा। यदि तीन घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं होती है तो बैंक गारंटी का 10 फीसदी या एक लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। यदि 12 घंटे बीतने के बाद भी सुधार नहीं होता है तो बैंक गारंटी का 20 फीसदी या तीन लाख रुपये जुर्माना लगेगा। 24 घंटे के भीतर सुधार न होने पर डीपीसीसी मौके पर पहुंच साइट को सील करने की कार्रवाई करेगी।