'ऑड-ईवन योजना से राजधानी को जाम से मिली निजात'
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प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार की सम-विषम योजना को सर्वोच्च न्यायालय के बाद अब हाईकोर्ट का भी साथ मिल गया। बृहस्पतिवार को राजधानी में वायु प्रदूषण मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार की इस योजना की सराहना करते हुए कहा कि इससे राजधानी को जाम से निजात मिली है और प्रदूषण नियंत्रण करने में सफलता मिली है। वहीं योजना को सही ढंग से लागू न करने पर दिल्ली पुलिस के रवैये पर नाराजगी भी जताई।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने जब इस योजना को सफल बताते हुए सराहना की तो पुलिस के अधिवक्ता व यातायात पुलिस के उपायुक्त ने तर्क रखा कि यह योजना इस कारण सफल रही कि जुर्माना दो हजार रुपये था और डर के कारण लोग सड़क पर वाहन लेकर नहीं आए।
खंडपीठ ने कहा कि ऐसा नहीं है। योजना अच्छी थी इसलिए लोगों ने इसे स्वयं अपनाया है। पुलिस इसे लागू करवाने का श्रेय नहीं ले सकती। अदालत ने कहा कि आपने इस योजना को लागू करने की दिशा में कुछ नहीं किया।
क्या आपकी जिम्मेदारी नहीं है कि सड़कों पर जाम न लगे
सरकार ने योजना को लागू करने के लिए वालंटियर को लगाया था उनका यातायात प्रबंधन ठीक था। अदालत ने पुलिस के इस तर्क पर नाराजगी जताई कि यह सरकार की योजना थी।
अदालत ने कहा कि सरकार की योजना क्या होती है, क्या आप सरकार में नहीं है। क्या आपकी जिम्मेदारी नहीं है कि सड़कों पर जाम न लगे।
पुलिस के अधिवक्ता ने कहा कि हमने 4800 चालान यातायात का उल्लंघन करने वालों के किए हैं। इसके अलावा हमने केंद्र सरकार से पूरे सिस्टम को सुधारने के लिए 480 करोड़ रुपये मांगे थे लेकिन एक वर्ष से फाइल अटकी हुई है।