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अतिथि शिक्षकों को गुमराह कर रही दिल्ली सरकार: विजेंद्र गुप्ता
Thu, 07 Mar 2019 02:32 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Thu, 07 Mar 2019 02:32 AM IST
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फाइल फोटो
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विपक्ष ने दिल्ली सरकार पर अतिथि शिक्षकों को गुमराह करने का आरोप मढ़ा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार उन्हें नियमित करने के वादे में तो विफल रही ही, साथ ही बड़ी चालाकी से इसे केंद्र सरकार व उपराज्यपाल के पाले में सरका दिया है। दिल्ली सरकार ने सिर्फ गुमराह करने वाले निर्णय कैबिनेट में लिए हैं।
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का वादा कर चुनाव में उतरी थी। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया एक बार फिर उन्हें गुमराह यह कह रहे हैं कि अपनी उम्र तक अतिथि शिक्षक काम करते रहेंगे।
इसका मतलब स्पष्ट है कि 60 साल तक पे-स्केल के सबसे नीचे पायदान पर बिना किसी पदोन्नति और अन्य सुविधाओं के उन्हें सरकार का बंधुआ मजदूर बनकर काम करना होगा। कोई रास्ता नहीं देख सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया है।
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गुप्ता ने बताया कि कैबिनेट में ये प्रस्ताव तो लाया गया, लेकिन शिक्षा, विधि और वित्त विभाग की स्वीकृति नहीं ली गई। ऐसे में इस प्रस्ताव का वहीं हश्र होना निश्चित प्रतीत होता है जो दिल्ली विधानसभा में 4 अक्तूबर 2017 को पेश बिल का हुआ था।
ये बिल भी बिना किसी नियम व अनिवार्य औपचारिक सहमति के बिना विधानसभा में पारित किया गया था। पिछले चार साल से सरकार अतिथि शिक्षकों का इस्तेमाल फुटबाल की तरह कर रही है। सरकार की नाकामियों की वजह से शिक्षक उस चौराहे पर खड़े हैं, जहां से इन्हें कोई अन्य राह नहीं है।
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विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का वादा कर चुनाव में उतरी थी। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया एक बार फिर उन्हें गुमराह यह कह रहे हैं कि अपनी उम्र तक अतिथि शिक्षक काम करते रहेंगे।
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इसका मतलब स्पष्ट है कि 60 साल तक पे-स्केल के सबसे नीचे पायदान पर बिना किसी पदोन्नति और अन्य सुविधाओं के उन्हें सरकार का बंधुआ मजदूर बनकर काम करना होगा। कोई रास्ता नहीं देख सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया है।
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गुप्ता ने बताया कि कैबिनेट में ये प्रस्ताव तो लाया गया, लेकिन शिक्षा, विधि और वित्त विभाग की स्वीकृति नहीं ली गई। ऐसे में इस प्रस्ताव का वहीं हश्र होना निश्चित प्रतीत होता है जो दिल्ली विधानसभा में 4 अक्तूबर 2017 को पेश बिल का हुआ था।
ये बिल भी बिना किसी नियम व अनिवार्य औपचारिक सहमति के बिना विधानसभा में पारित किया गया था। पिछले चार साल से सरकार अतिथि शिक्षकों का इस्तेमाल फुटबाल की तरह कर रही है। सरकार की नाकामियों की वजह से शिक्षक उस चौराहे पर खड़े हैं, जहां से इन्हें कोई अन्य राह नहीं है।