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अब दिल्ली के 4000 शिक्षकों की नौकरी है खतरे में

Thu, 02 Jul 2015 02:14 PM IST
Updated Thu, 02 Jul 2015 02:14 PM IST
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Delhi government does not want, however, 4000 teachers' job in jeopardy

दिल्ली सरकार के मना करने के बावजूद तीनों नगर निगम अनुबंध के आधार पर वर्षों ने कार्यरत करीब चार हजार शिक्षकों को हटा रही हैं। वह ऐसे अधिकतर शिक्षकों का अनुबंध बढ़ा नहीं रही हैं।

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जबकि प्रतिवर्ष 1 जुलाई को 10 माह तक उनका अनुबंध बढ़ा दिया जाता था। इसको लेकर ऐसे शिक्षकों ने बुधवार को दो नगर निगम के मुख्यालय सिविक सेंटर के सामने कई घंटे तक चक्का जाम किया।

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उनकी इस समस्या को लेकर उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति में चर्चा हुई, मगर उनको राहत देने के लिए परिणाम नहीं निकला। एकीकृत नगर निगम के समय ही शिक्षकों के रिक्त पदों पर अनुबंध के आधार पर भर्ती करने की पहल शुरू हुई।
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तीनों निगम ने भी समय-समय पर अनुबंध के तहत शिक्षकों की भर्ती की। हाल ही में डीएसएसबी ने तीनों निगम में शिक्षकों के रिक्त करीब पांच हजार में से चार हजार पदों पर स्थायी भर्ती कर दी। तीनों निगम आजकल स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति कराने में जुटी हुई हैं।

निगम ने रोक दी करार बढ़ाने की प्रक्रिया

Delhi government does not want, however, 4000 teachers' job in jeopardy

उधर, तीनों निगम ने अभी तक अनुबंध के आधार पर कार्यरत शिक्षकों के साथ करार बढ़ाने की प्रक्रिया रोक दी है। स्थायी समिति की बैठक में आम आदमी पार्टी के पार्षद राकेश कुमार ने इस मुद्दे को उठाया।


उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किसी भी अस्थायी और अनुबंध के आधार पर कार्यरत कर्मचारी को हटाने से मना करने संबंधी सभी विभागों में आदेश दे रखे हैं। इसके बावजूद शिक्षकों को हटाना गलत है। विपक्ष के नेता मुकेश गोयल व उनके साथी पार्षद पृथ्वी सिंह राठौर ने भी शिक्षकों का अनुबंध नहीं बढ़ाने की निंदा की।

इसी बीच शिक्षा निदेशक संगीता बंसल ने बताया कि स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति होने और बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अनुबंध के आधार पर शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।

यह प्रक्रिया 31 अगस्त तक जारी रहेगी। उनके पास 70 प्रतिशत से अधिक स्थायी शिक्षक आ गए हैं। अन्य दोनों निगम भी इस तरह की ही प्रक्रिया अपना रही हैं। इस तरह करीब चार हजार शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे।

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