चुनाव से डरी सरकार, नहीं लागू किए 5 फैसले
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राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति शासन होने के कारण जनता पर सरकार कोई बोझ नहीं डालना चाहती है। सर्किल रेट, महिलाओं के लिए हेलमेट की अनिवार्यता, डीटीसी-मेट्रो रेल किराया वृद्घि, वाहनों के वीआईपी नंबर की नीलामी, वस्तुओं पर वैट प्रावधान पर सरकार ने पैर रोक लिए हैं।
राजस्व वसूली के मामले टाले जा रहे हैं जबकि वसूली लक्ष्य से काफी पिछड़ रहा है। कहा जा रहा है कि जब नई सरकार आएगी तो अंतिम फैसला लेगी। दिल्ली सरकार के उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि उपराज्यपाल नजीब जंग राष्ट्रपति शासन में कोई नया कर भार लगाकर अपने नाम से उसे नहीं जोड़ना चाहते हैं।
फिर भाजपा की सरकार केंद्र में आई तो चुनाव में मुश्किलों के चलते कोई नया भार जनता पर नहीं डाल रही है। विभागों की तरफ से जो प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं, उस पर कभी वित्त विभाग तो कभी कानून विभाग की आपत्ति लगाकर देरी की जा रही है।
सर्किल रेट में सुपर पॉश श्रेणी का पेंच
दिल्ली में प्रत्येक दो साल में सर्किल रेट बढ़ाने का प्रावधान है। उसे देखते हुए लोकसभा चुनाव से पूर्व राजस्व विभाग ने सर्किल रेट बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की थी।
उसमें एक नई सुपर पॉश श्रेणी जोड़कर रेट में वृद्घि करने का प्रस्ताव है।
वृद्धि प्रतिशत पर वित्त विभाग ने आपत्ति जताई है। राजस्व विभाग ने जबाव दिया, लेकिन अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है।
महिलाओं के लिए हेलमेट का मामला लंबित
परिवहन विभाग ने महिलाओं के लिए हेलमेट अनिवार्यता के जिस प्रस्ताव पर सुझाव मंगाए थे, उसमें बदलाव किया गया। सिख महिलाओं को छोड़कर बाकी के लिए दुपहिया चलाते या पीछे बैठते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा।
इस पर कानून विभाग ने आपत्ति दर्ज करा दी है। कानून विभाग ने कहा है कि ड्राफ्ट में सबके लिए अनिवार्य किए जाने की बात थी। इसलिए दोबारा सुझाव मांगे। विभाग की तरफ से इस मामले को लंबित रखा गया है।
मेट्रो और डीटीसी का नहीं बढ़ा किराया
मेट्रो रेल, डीटीसी में किराया वृद्घि 2010 में की गई थी। जबकि ऑटो रिक्शा का किराया बढ़ाया जा चुका है। डीएमआरसी किराया वृद्घि की मांग कई स्तर पर उठा चुका है तो डीटीसी भी प्रस्ताव भेज चुका है।
किराया वृद्घि पहले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के कारण नहीं हुई तो अब फिर दिल्ली में विधानसभा चुनाव के डर से रोका गया है।
वाहनों के वीआईपी नंबरों की नीलामी नहीं हुई
दिल्ली में वाहनों के वीआईपी नंबरों की नीलामी को कैबिनेट की मंजूरी मिले एक साल से अधिक बीत चुके हैं। प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी है, लेकिन उसे टाला जा रहा है।
शुरुआत में सॉफ्टवेयर बनने की देरी फिर नीलामी एजेंसी चयन को लेकर मामला टलता रहा।
विभाग के सूत्र बताते हैं कि प्लेटफार्म तैयार हो चुका है लेकिन नीलामी की तारीख अभी तय नहीं है। इसके अलावा वाहन रजिस्ट्रेशन पर कर वृद्घि का प्रस्ताव लंबित रखा गया है।
नए प्रोजेक्ट की शुरुआत से भी खींच रहे हैं हाथ
रैपिड मेट्रो फिलहाल गुड़गांव में ही चलाई जा रही है।