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दिल्ली सरकार ने निजी अस्पतालों से मांगी कोरोना उपचार शुल्क की जानकारी
Sun, 14 Jun 2020 02:16 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Sun, 14 Jun 2020 02:16 PM IST
सार
- सोशल मीडिया पर मैक्स अस्पताल का रेट कार्ड वायरल होने के बाद उठाया कदम
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hospital
- फोटो : hospital
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विस्तार
सोशल मीडिया पर निजी अस्पतालों में कोरोना के महंगे उपचार को लेकर मचे बवाल के बाद दिल्ली सरकार ने सभी अस्पतालों से इलाज के खर्च की जानकारी मांगी। स्वास्थ्य सत्येंद्र जैन ने कहा कि अस्पतालों से खर्च की जानकारी मिलने के बाद आगे की योजना पर विचार किया जाएगा। मैक्स अस्पताल का रेट कार्ड सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह चर्चा होती रही कि यहां आम आदमी का इलाज कितना महंगा है।
मैक्स अस्पताल के रेट के अनुसार वहां वेंटीलेटर युक्त आईसीयू का शुल्क 72 हजार बताया गया। वहीं मैक्स हैल्थकेयर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उस रेट कार्ड में रूटीन जांच, दवाओं, डॉक्टर तथा नर्स के शुल्क जैसे सभी तथ्य नहीं दिखाए गए थे।
सत्येंद्र जैन ने निजी अस्पताल में कोरोना के उपचार के शुल्क की अधिकतम सीमा तय करने के मुद्दे पर कहा कि सभी अस्पतालों से कोरोना मरीजों से ली जा रही फीस के आंकड़े मांग गए हैं। उनका विश्लेषण करने के बाद आगे योजना बनाई जाएगी कि क्या करना है।
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वहीं रेट कार्ड सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मैक्स हैल्थकेयर ने कहा कि उसकी साकेत ब्रांच ही कोविड स्पेशल है और उसे अब तक साढ़े छह करोड़ का घाटा हो चुका है। यह तब है जब वरिष्ठ डॉक्टरों का वेतन 20 से 50 फीसदी तक काटा गया है। कोरोना का उपचार बेहद महंगा है और ऐसे हालात में लाभ कमाने की बातें करना बेमानी है।
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मैक्स अस्पताल के रेट के अनुसार वहां वेंटीलेटर युक्त आईसीयू का शुल्क 72 हजार बताया गया। वहीं मैक्स हैल्थकेयर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उस रेट कार्ड में रूटीन जांच, दवाओं, डॉक्टर तथा नर्स के शुल्क जैसे सभी तथ्य नहीं दिखाए गए थे।
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सत्येंद्र जैन ने निजी अस्पताल में कोरोना के उपचार के शुल्क की अधिकतम सीमा तय करने के मुद्दे पर कहा कि सभी अस्पतालों से कोरोना मरीजों से ली जा रही फीस के आंकड़े मांग गए हैं। उनका विश्लेषण करने के बाद आगे योजना बनाई जाएगी कि क्या करना है।
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वहीं रेट कार्ड सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मैक्स हैल्थकेयर ने कहा कि उसकी साकेत ब्रांच ही कोविड स्पेशल है और उसे अब तक साढ़े छह करोड़ का घाटा हो चुका है। यह तब है जब वरिष्ठ डॉक्टरों का वेतन 20 से 50 फीसदी तक काटा गया है। कोरोना का उपचार बेहद महंगा है और ऐसे हालात में लाभ कमाने की बातें करना बेमानी है।