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दिल्ली गैंगरेप के 2 आरोपियों की फांसी पर रोक
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 16 Mar 2014 12:07 PM IST
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वसंत विहार गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को चार में से दो दोषियों की सजा-ए-मौत पर रोक लगा दी। दोषी पवन और मुकेश ने सर्वोच्च अदालत में दिल्ली हाईकोर्ट के 13 मार्च के आदेश को चुनौती दी है।
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सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने दोनों दोषियों की ओर से पेश अधिवक्ता एमएल शर्मा की दलीलों पर गौर करने के बाद मृत्युदंड पर रोक लगाने का आदेश दिया।
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पीठ ने कहा कि अदालत पवन और मुकेश की फांसी की सजा पर 31 मार्च तक के लिए रोक लगाती है और इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए पीठ तय करने को याचिका मुख्य न्यायाधीश पी. सदाशिवम के समक्ष भेजती है। साथ ही जेल प्राधिकरण को इस आदेश से अवगत कराए जाने का निर्देश देती है।
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इससे पहले पीठ के समक्ष अधिवक्ता शर्मा ने कहा कि मेरे दोनों मुवक्किलों की ओर से हाईकोर्ट की ओर से दोषी करार दिए जाने और अपील खारिज किए जाने के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता ने डीएनए और पीड़िता की अंतड़ियों को बाहर निकालने की पुलिस की कहानी पर सवाल उठाया।
इसके साथ ही फांसी पर तत्काल रोक लगाने की गुजारिश की, जिस पर पीठ ने आदेश जारी कर दिया और सुनवाई की अगली तारीख 31 मार्च तय कर दी। इस दौरान अदालत में दोषी मुकेश की मां मौजूद थी। गैंगरेप के मुख्य आरोपी रामसिंह ने जेल में फांसी लगाकर जान दे दी थी। वह मुकेश का भाई था।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि चारों दोषी विनय, पवन, मुकेश, अक्षय व उसके दो अन्य साथियों ने जिस जघन्य तरीके से पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी, उसकी कोई तुलना नहीं है। सभी तथ्यों को देखने से स्पष्ट है कि यह मामला दुर्लभतम श्रेणी में आता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने चारों को मिली मृत्युदंड की सजा को बरकरार रखा था।