दिल्ली गैंगरेप के दो और आरोपियों की फांसी पर रोक
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के निर्भया सामूहिक बलात्कार कांड के दो और दोषियों की फांसी की सजा पर सोमवार को रोक लगा दी।
शीर्ष अदालत ने अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा की अपील की सुनवाई के दौरान इन दोनों की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगाने का आदेश जारी किया।
दोनों ने मृत्युदंड के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट दोषी मुकेश कुमार और पवन गुप्ता की भी फांसी पर रोक लगा चुका है।
मुकेश और पवन की सजा रोकने को बनाया आधार
दिल्ली गैंगरेप मामले में जब दिल्ली हाईकोर्ट ने चार आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई, तो मुकेश कुमार और पवन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट के फैसले खिलाफ अपील दायर की।
इसके बाद उनकी फांसी पर रोक लगा दी गई। इसी को आधार बनाकर अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सोमवार को उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इनकी फांसी पर रोक लगा दी।
मामले की शुरुआती सुनवाई में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 13 सितंबर, 2013 को चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा मुकर्रर की थी। बाद में हाई कोर्ट ने भी 15 मार्च, 2014 को फांसी की सजा बरकरार रखी थी।
वो काली भयानक रात
दिल्ली के वसंत विहार इलाके में 16 दिसम्बर 2012 को पैरा मेडिकल की 23 वर्षीया छात्रा के साथ एक बस में सामूहिक बलात्कार किया गया था। उसे इलाज के लिए सिंगापुर के अस्पताल में भेजा गया था। वहां इलाज के दौरान उसकी 29 दिसम्बर 2012 को मौत हो गई थी।
इस मामले में एक किशोर सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों में से एक ने तिहाड जेल में फांसी लगाकर जान दे दी थी।
जबकि किशोर आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड ने तीन साज के लिए बाल सुधार गृह भेजने का निर्देश दिया था। अन्य चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी।