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दिल्ली अग्निकांड में बड़ा खुलासा: ममटी में नहीं थी वेंटिलेशन की जगह, इस कारण हुई ज्यादा मौत, सामने आई बड़ी कमी

Tue, 05 May 2026 03:18 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 05 May 2026 03:18 PM IST
सार

दिल्ली के विवेक विहार की जिस इमारत में आग लगी, उस समय इमारत की पार्किंग में 15 से अधिक गाड़ियां मौजूद थीं। इनमें भी पांच से छह कारें इलेक्ट्रिक (ईवी) थीं। मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि यदि आग नीचे पहुंचती तो इन कारों में आग लग जाती। ऐसे में कई गाड़ियों में ब्लास्ट हो सकता था।

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Delhi Fire Tragedy No Ventilation in Terrace Room amid Turned Deadly Details in Hindi
विवेक विहार में चार मंजिला इमारत में लगी आग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के विवेक विहार में आग पर काबू पाने के बाद दमकल अधिकारियों ने पूरी इमारत का बेहद बारीकी से मुआयना किया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इमारत की ममटी (छत पर जाने का गेट) की जांच करने पर बड़ी कमी नजर आई। ममटी में हवा आने और जाने का भी रास्ता नहीं था। 
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सुरक्षा के दृष्टि से शायद इसे बंद किया गया था। यदि ममटी में वेंटिलेशन होता तो आग लगने पर धुआं जानलेवा बनने के बजाय बाहर निकल जाता। इससे लोगों को बाहर निकलने का वक्त मिल जाता।
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धुआं इमारत के फ्लैट के भीतर ही घूमने से कुछ ही देर में लोगों का दम घुट गया। हादसे में बुजुर्ग किराना कारोबारी अरविंद जैन, इनकी पत्नी अनीता, बेटा निशांक, बहू आंचल और पोता आनु फ्लैट से बाहर भी नहीं निकल सके। 

 

चौथी मंजिल पर मौजूद नितिन जैन, इनकी पत्नी शैली और बेटा सम्यक के शव भी सीढ़ियों पर पड़े मिले। अंदेशा जताया जा रहा है कि अग्निकांड की चपेट में आने से पहले धुएं की चपेट में आने से यह लोग बेहोश हो गए होंगे। 
 
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अधिकारी ने बताया कि धुआं बाहर निकल गया होता तो ये लोग इतनी जल्दी बेसुध नहीं होते और इन्हें सामने वाले फ्लैट में जाकर अपनी जान बचाने का मौका मिल जाता। धुआं और हीट ने उनका रास्ता ब्लॉक कर दिया और वह वहीं पर फंस गए, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई।

 

विवेक विहार में 800 गज की जिस इमारत में आग लगी उसमें 400-400 गज के दो फ्लैट आगे-पीछे करके बने हैं। चौथी मंजिल के फ्लैट मालिकों के पास अपनी-अपनी छत है। हादसे में जान गंवाने वाले नितिन जैन के परिवार के पास ही छत की चाबी रहती थी। इमारत में जब आग लगी तो उन्होंने अपने फ्लैट से निकलकर छत पर जाने का प्रयास किया।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि परिवार के पास चाबी होने के बावजूद वह ममटी पर लगे ताले को खोल नहीं पाए। अंदेशा है कि इससे पहले परिवार दरवाजे तक पहुंच पाता, वह उससे पहले ही अचेत होकर गिर गया। बाद में आग ऊपर पहुंची तो तीनों के शरीर झुलस गए। 

 

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि इन लोगों की मौत झुलसने की वजह से हुई है या फिर दम घुटने की वजह से, मामले की जांच जारी है। हालांकि वरिष्ठ अधिकारी यह नहीं बता रहे हैं कि तीनों मृतकों के पास उस समय चाबी थी या नहीं। अधिकारी जांच की बात कर रहे हैं।

पार्किंग तक पहुंचती आग तो और ज्यादा जाती जानें
विवेक विहार की जिस इमारत में आग लगी, उस समय इमारत की पार्किंग में 15 से अधिक गाड़ियां मौजूद थीं। इनमें भी पांच से छह कारें इलेक्ट्रिक (ईवी) थीं। मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि यदि आग नीचे पहुंचती तो इन कारों में आग लग जाती। 

 

ऐसे में कई गाड़ियों में ब्लास्ट हो सकता था। ईवी वाहनों में आग लगने की सूरत में बैटरी फटने की संभावना ज्यादा होती है। यदि ऐसा होता इमारत में जान-माल की अधिक क्षति होती। दमकल की टीम जब पहुंची तो आग दूसरी और तीसरी मंजिल तक पहुंच चुकी थी। 

 

रेस्क्यू के दौरान टीम की प्राथमिकता आग को नीचे की ओर आने से रोकना भी था। टीम की यह योजना कामयाब भी रही, आग को पहली मंजिल के फ्लैट तक भी नहीं आने दिया गया। पार्किंग में मौजूद किसी भी गाड़ी को नुकसान नहीं पहुंचा। 

 

आग से पीछे की ओर बने तीन फ्लैट और आगे की ओर बने तीसरी, चौथी मंजिल के फ्लैट को नुकसान हुआ है। दमकल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इमारत के सामने इतना चौड़ा रोड होने के बावजूद वहां रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आई। इमारत के ठीक सामने दो गाड़ियां खड़ी थीं। इसकी वजह से मौके पर सीढ़ी नहीं लग पा रही थी। बाद में किसी तरह सीढ़ी लगाकर सामने की ओर से लोगों को ऊपर की मंजिलों से निकाला गया।
 
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