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अग्निकांड: क्षत-विक्षत हालत के चलते पहचान मुश्किल, चार शवों की हो सकती है डीएनए जांच

Mon, 09 Dec 2019 06:07 AM IST
संजीव कुमार झा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 09 Dec 2019 06:07 AM IST
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Delhi Fire Tragedy,DNA test could be possible of four dead bodies for identification
delhi fire - फोटो : अमर उजाला

हादसे के बाद सभी मृतकों की पहचान कराना पुलिस के लिए काफी मुश्किल हो रहा है। पहचान के लिए चार शवों की डीएनए जांच कराई जा सकती है। ये चारों ही शव क्षत-विक्षत अवस्था में हैं। इनमें से तीन एलएनजेपी और एक लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के शवगृह में हैं। हालांकि सोमवार को फॉरेंसिक पोस्टमार्टम के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी।

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एलएनजेपी अस्पताल में मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 43 में से 34 लोगों के शव यहां हैं, जबकि 9 के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में। रविवार शाम तक 43 में से 32 मृतकों की पहचान हो चुकी थी। लोकनायक में 34 में से 29 और लेडी हार्डिंग में 9 में से 3 शवों की पहचान हो पाई है।
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पहचान के लिए चार शवों की डीएनए जांच पर फैसला सोमवार को सभी मृतकों के परिजनों से दोबारा पहचान कराने के बाद लिया जाएगा। एलएनजेपी अस्पताल के शवगृह में रखे दो शव करीब 80 फीसदी तक जले हुए हैं। इनकी भी पहचान नहीं हो पा रही है।
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दूसरी ओर, एलएनजेपी अस्पताल के फॉरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि 80 फीसदी से ज्यादा शरीर आग में जलने के बाद पहचान काफी मुश्किल होती है। ऐसे में पुलिस के पास डीएनए जांच ही एकमात्र विकल्प है। इसी साल 12 फरवरी को हुए अर्पित होटल कांड में भी पुलिस को आरएमएल अस्पताल के शवगृह में रखे एक शव की डीएनए जांच करानी पड़ी थी। फॉरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि डीएनए जांच में करीब 2 दिन लगेंगे। इसके लिए पुलिस को रोहिणी एफएसएल की मदद लेनी होगी।

उधर, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के एक फॉरेसिंक विशेषज्ञ ने बताया कि उनके यहां शवगृह में पोस्टमार्टम के लिए 9 लोगों के शव आए थे। इनमें से 3 की पहचान दिल्ली पुलिस करा चुकी है, लेकिन 6 की नहीं हो पाई है। इनमें से भी एक शव की हालत बहुत खराब है। बगैर डीएनए जांच कराए उसकी पहचान कर पाना संभव नहीं है।

64 में से 54 लोग आग नहीं, धुएं के हुए शिकार

एलएनजेपी अस्पताल के डॉ. पीएस भंडारी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद वे रविवार सुबह ही अस्पताल पहुंच गए थे। ज्यादातर लोग आग नहीं, बल्कि धुएं के शिकार होने के कारण अस्पताल में आए हैं। बर्न विभाग में 9 में से एक को छोड़ बाकी 3 से 5 फीसदी ही जले हैं।



इन लोगों से बातचीत में उन्हें पता चला कि धुएं में दम घुटने से ये बेहोश हो गए थे। इसके बाद आग की चपेट में आए। वहीं शवों को अस्पताल तक लाई पुलिस के अनुसार ज्यादातर केस दम घुटने से मौत के लग रहे हैं। 21 घायलों में से 3 ही सबसे ज्यादा आग की चपेट में आए हैं। वहीं, मृत 43 में से करीब 7 शव ऊपरी तौर पर आग की चपेट में आए थे। ये अनुमान पुलिस और दोनों ही अस्पतालों के डॉक्टरों ने लगाया है।

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