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Delhi : अधिकतम तापमान बढ़ने से त्वचा कैंसर की आशंका, 37 डिग्री तक नियंत्रित कर सकता है मानव शरीर

Sun, 02 Jun 2024 02:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा राकेश शर्मा, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 02 Jun 2024 02:09 AM IST
सार

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान इसी तरह से बढ़ता रहा तो भारतीयों में भी त्वचा कैंसर के मामले बढ़ सकते हैं।

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Delhi: Fear of skin cancer due to increase in maximum temperature
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विस्तार

पारा बढ़ने से त्वचा कैंसर की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान इसी तरह से बढ़ता रहा तो भारतीयों में भी त्वचा कैंसर के मामले बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीयों में मेलेनोमा कोशिकाएं पाई जाती हैं। इस कारण त्वचा धूप के संपर्क में आने पर अपना रंग बदल लेती हैं, लेकिन इन कोशिकाओं की भी एक क्षमता है। यदि कोई व्यक्ति आठ-दस साल तक तेज धूप के संपर्क में रहता है तो उसमें मैलेनोमा, बेसल सेल और स्क्वैमस सेल कैंसर होने की आशंका बढ़ जाएगी।

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सफदरजंग अस्पताल की चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. कृति दीवान ने कहा कि भारतीयों में त्वचा कैंसर होने की आशंका बहुत कम होती है। लेकिन तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो त्वचा कैंसर के मामले तेजी से बढ़ेंगे। बुधवार को दिल्ली के एक इलाके का पारा 52 डिग्री पार कर गया। यह शरीर की सीमा से अधिक है। इसके कारण शरीर में कई तरह के नुकसान होंगे। शरीर पर तिल व मस्से की संख्या बढ़ जाएंगे, यदि नहीं है तो हो जाएंगे। साथ ही उनके रंगों में भी तेजी से बदलाव होगा। जो लंबे समय के बाद कैंसर का रूप ले सकता है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को हो सकता है। यह सीधे या नजदीक पराबैंगनी किरण ए और बी के संपर्क में रहते हैं।
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37 डिग्री तापमान को नियंत्रित कर सकता है शरीर
मनुष्य का शरीर लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तापमान को नियंत्रित कर सकता है। हालांकि जलवायु, परिस्थितियों व अन्य कारणों से शरीर 40 डिग्री सेल्सियस तक खुद को नियंत्रित कर सकता है। उच्चतम तापमान को नियंत्रित करने के लिए शरीर पस्पलेशन, रक्त प्रवाह और श्वेत पसीना का सहारा लेता है। एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पीयूष रंजन ने कहा कि धूप के कारण शरीर में पानी व नमक की कमी हो जाती है। निर्जलीकरण के कारण शरीर के सभी अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। शरीर में यदि इलेक्ट्रोलाइट प्रभावित होगा तो दिल, किडनी सहित दूसरे सभी अंगों को बुरी तरह से प्रभावित करेगा।
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किस अंग पर क्या नुकसान

  • त्वचा : तेज धूप के कारण त्वचा जल सकती है और सूखने के कारण चकत्ते, खुजली, लालिमा, और फोड़े हो सकते हैं
  • आंखें : लंबे समय तक धूप में रहने से आंखों में जलन, लालिमा और दर्द हो सकता है
  • माथा : धूप के कारण सिरदर्द और शरीर का तापमान बढ़ सकता है
  • गला : तेज धूप से गले में सूजन, जलन और खराश हो सकती है
  • पैरों की उंगलियां : जलन और सूजन हो सकती है
  • श्वास नली : धूप के अधिक अवशोषण से श्वास नली में सूखापन और तनाव हो सकता है
  • रक्त : रक्त चालन की स्थिति कमजोर हो सकती है
  • अस्थि : धूप के कम अवशोषण से विटामिन डी की कमी हो सकती है, जो अस्थियों को प्रभावित कर सकती है

बचाव के लिए क्या करें

  • दोपहर के समय घर से बाहर न निकलें
  • शरीर में पानी की कमी न होने दें
  • ओआरएस का घोल पीते रहें
  • हल्के व पूरे बाजू के कपड़े पहनें
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