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Delhi Election 2025: कुल 1522 नामांकन में से 477 खारिज, नई दिल्ली सीट पर सबसे ज्यादा हलचल; जानें अन्य का हाल

Sun, 19 Jan 2025 05:35 AM IST
श्याम जी. मोहम्मद बिलाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
मोहम्मद बिलाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्याम जी. Updated Sun, 19 Jan 2025 05:35 AM IST
सार

नई दिल्ली विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा हलचल है, जहां 29 उम्मीदवारों ने 40 नामांकन पत्र भरे हैं। यहां से पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, भाजपा के प्रवेश वर्मा और कांग्रेस के संदीप दीक्षित उम्मीदवार हैं। 
 

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Delhi Election 2025 981 candidates filled 1521 nomination papers
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधानसभा चुनाव 2025 के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गई है। इस बार 981 उम्मीदवारों ने 1522 नामांकन पत्र भरे हैं। 1522 नामांकन में से 477 खारिज कर दिए गए हैं। नई दिल्ली विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा हलचल है, जहां 29 उम्मीदवारों ने 40 नामांकन पत्र भरे हैं। यहां से पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, भाजपा के प्रवेश वर्मा और कांग्रेस के संदीप दीक्षित उम्मीदवार हैं। यह सीट शुरुआत से ही हाई-प्रोफाइल रही है और इस बार भी यह चर्चा का केंद्र बनी हुई है। वहीं, सबसे कम कस्तूरबा नगर सीट पर छह उम्मीदवारों ने नौ नामांकन पत्र भरे हैं। आप के रमेश पहलवान, भाजपा के नीरज बसोया और कांग्रेस के अभिषेक दत्त चुनावी मैदान में हैं।

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कालकाजी सीट पर 18 उम्मीदवारों ने 28 नामांकन पत्र भरे हैं। इस सीट से मुख्यमंत्री आतिशी, भाजपा के रमेश बिधूड़ी और कांग्रेस की अल्का लांबा उम्मीदवार हैं। बल्लीमारान सीट पर 12 उम्मीदवारों ने 16 नामांकन पत्र भरे हैं। यहां से आप के कैबिनेट मंत्री इमरान हुसैन, कांग्रेस के हारुन यूसुफ और भाजपा के कमल बागड़ी उम्मीदवार हैं। ग्रेटर कैलाश सीट पर 10 उम्मीदवारों ने 15 नामांकन पत्र भरे हैं। इस सीट से आप से कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज, भाजपा की शिखा राय और कांग्रेस के गर्वित सिंघवी मैदान में हैं।
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पूर्व मुख्यमंत्री की सीट पर 12 उम्मीदवार
जंगपुरा से 12 उम्मीदवारों ने 19 नामांकन पत्र भरे हैं। यहां से आप के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, भाजपा के तरविंदर सिंह मारवाह और कांग्रेस के फरहाद सूरी प्रत्याशी हैं। बाबरपुर सीट पर 16 उम्मीदवारों ने 26 नामांकन पत्र हैं। यहां से आप के कैबिनेट मंत्री गोपाल राय, भाजपा के अनिल वशिष्ठ और कांग्रेस के हाजी मोहम्मद इशराक खान मैदान में हैं। सुल्तानपुर माजरा सीट पर 15 उम्मीदवारों ने 19 नामांकन पत्र भरे हैं। इस सीट से आप से कैबिनेट मंत्री मुकेश अहलावत, कांग्रेस के जय किशन और भाजपा के कर्म सिंह कर्मा उम्मीदवार हैं। 
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शकूरबस्ती सीट पर 11 उम्मीदवारों ने 20 नामांकन पत्र भरे
शकूरबस्ती सीट पर 11 उम्मीदवारों ने 20 नामांकन पत्र भरे हैं। यहां से आप के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन, भाजपा के करनैल सिंह और कांग्रेस के सतीश लथूरा प्रत्याशी हैं। पटपड़गंज सीट पर भी 11 उम्मीदवारों ने 20 नामांकन पत्र भरे हैं। यहां से आप के अवध ओझा, भाजपा के रविंदर सिंह नेगी और कांग्रेस के अनिल चौधरी मैदान में हैं। इन नामांकन पत्रों से यह स्पष्ट है कि दिल्ली में विधानसभा चुनावों के दौरान विभिन्न सीटों पर कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी, जो आने वाले दिनों में चुनावी माहौल को और गरम करेगा।

2020 में निर्दलीय प्रत्याशियों पर नोटा भारी पड़ा था
देश की राजधानी में वर्ष-2020 के विधानसभा चुनाव में 148 निर्दलीय प्रत्याशियों पर नोटा भारी पड़ा था। इन प्रत्याशियों को कुल 35374 मत मिले थे। यह कुल मत प्रतिशत का 0.38 प्रतिशत था, जबकि नोटा को 43019 मत मिले थे जो कुल मत का 0.46 प्रतिशत था।

2009 में पहली बार नोटा का उपयोग किया गया था
दरअसल, वर्ष 2009 में स्थानीय निकाय के चुनावों में पहली बार नोटा का उपयोग किया गया था। यह विकल्प देने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना था। इसके बाद चुनाव आयोग ने वर्ष-2013 में विधानसभा चुनावों में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में नोटा का विकल्प दिया।  चुनाव आयोग ने दिल्ली की जनता को यह अधिकार भी पहली बार वर्ष 2013 के चुनाव में दिया था। 

यह पहला मौका था जब दिल्ली समेत चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में नोटा का इस्तेमाल किया गया। उस समय दिल्ली के साथ छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में चुनाव हुए थे। इस चुनाव में 49884 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में कुल 35875 नागरिकों ने नोटा का इस्तेमाल किया था।
प्रत्याशी पसंद नहीं आने पर चुना जाता है नोटा

इसलिए दबाते हैं नोटा का बटन
चुनाव के दौरान मतदान करते वक्त अगर मतदाता को लगता है कि कोई भी उम्मीदवार योग्य नहीं है, तो मतदाता नोटा का बटन दबा सकता है। चुनाव आयोग के मुताबिक नोटा का इस्तेमाल जनता को यह अधिकार देता है कि वे किसी भी उम्मीदवार को वोट देने से इनकार कर सकते हैं। यह विकल्प उन्हें लोकतंत्र में अपनी असंतुष्टि व्यक्त करने का एक तरीका प्रदान करता है। 


हालांकि, परिणामों पर नोटा का सीधा असर नहीं होता, लेकिन यह संकेत देता है कि चुनावी प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है। चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक नोटा के बढ़ते प्रभाव के बावजूद यह जरूरी है कि राजनीतिक दल इस पर गंभीरता से विचार करें। यदि नोटा का प्रतिशत अधिक बढ़ता है, तो यह उस क्षेत्र की राजनीति में एक नई दिशा को जन्म दे सकता है।

विधानसभा चुनाव में नोटा
वर्ष, निर्दलीय प्रत्याशी, मत मिले, नोटा
2013 222 49774 49884
2015 195 47627 35875
2020 148 35374 43019


 
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