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दिल्ली चुनाव: जब नेताजी ने अपनी पत्नी के पांव छूकर मांग लिया था वोट
Thu, 23 Jan 2020 12:31 AM IST
Abhishek Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhishek Singh
Updated Thu, 23 Jan 2020 12:31 AM IST
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जयप्रकाश अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
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चुनाव प्रचार के दौरान कई बार बड़े अजीब वाकये हो जाते हैं। 1989 चुनाव का एक मसला याद आता है। चांदनी चौक से चुनाव लड़ रहा था। कांग्रेस के लिए दुबारा सीट बचाने की चुनौती थी। उस वक्त प्रचार के आज जैसे साधन तो थे नहीं, तो सुबह-सुबह ही चुनाव प्रचार के लिए निकल पड़ता था। गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले भागदौड़ चलती रहती थी।
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वोटिंग के दो-तीन दिन पहले की बात है। प्रचार के आखिरी दिनों में ज्यादा से ज्यादा वोटर तक पहुंचने की कोशिश रहती थी। उस दिन हुआ यह कि देर शाम तक बैठकों का दौर चला। इसके बाद लोगों से मुलाकात का जो सिलसिला शुरू हुआ वो रात दो बजे तक चलता रहा। इसके बाद घर लौटने की बारी आई।
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रात करीब ढाई बजे घर पहुंचा। एक-दो सहयोगी छोड़ने आए थे। उन्हें बाहर से विदा किया और डोर वेल बजाकर गेट खुलने का इंतजार करने लगा। इस बीच मैं भूल सा गया कि अपने घर पर खड़ा हूं। वोट मांगने की आदत ऐसी पड़ी, कि सामने खड़ी पत्नी भी वोटर नजर आईं। आव न देखा ताव, मैंने उनके पैर छुए और खुद को वोट देने की अपील की। हमारे इस व्यवहार से पत्नी हड़बड़ा गईं।
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उन्होंने सवाल किया कि अरे, यह क्या रहे हो आप? पत्नी की आवाज सुनकर समझ गया कि गड़बड़ हो गई है। फिर, हम दोनों मुसकराते हुए घर में दाखिल हुए। बहरहाल, इस सबके बीच दुबारा जीत हासिल करने में कामयाबी मिल गई। बाद में कभी-कभार पत्नी चुटकी लेती कि जब मेरा आशीर्वाद मिल गया था, तो कौन चुनाव हरा सकता था।