आप का दावा- फ्लैट घोटाला उजागर होने के बाद झूठ बोल रहे हैं केंद्रीय मंत्री पुरी
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आम आदमी पार्टी (आप) ने लगातार दूसरे दिन सोमवार को भी केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि गरीबों के फ्लैट घोटाले का उजागर होने के बाद केंद्रीय मंत्री इससे पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि जुलाई 2019 में ही उनको इस मसले में नोटिस मिला है। आप सांसद संजय सिंह के मुताबिक, घोटाले को छिपाने के लिए केंद्रीय मंत्री और डीडीए अधिकारी झूठ बोल रहे हैं।
सांसद सिंह ने सोमवार को पार्टी दफ्तर में मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि गरीबों के फ्लैट के नाम पर हुए करोड़ों का घोटाला उजागर होने के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और डीडीए के अधिकारियों की जिस तरह से प्रतिक्रिया आई है, उससे साबित होता है कि घोटाला बड़े स्तर का है।
संजय सिंह के मुताबिक, वह हैरान हैं कि केंद्रीय मंत्री होकर हरदीप सिंह पुरी देश व दिल्ली की जनता से झूठ बोल रहे हैं। जबकि 13 जुलाई को ही दिल्ली के उपराज्यपाल, प्रधानमंत्री कार्यालय, शहरी विकास मंत्री कार्यालय समेत दूसरे विभागों को आवेदनकर्ताओं ने नोटिस भेज दिया था। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे में केंद्रीय मंत्री मामले की जानकारी नहीं होने की बात कहकर झूठ बोल रहे हैं? इससे घोटाले के संदेह की सुई पुख्ता होती है।
संजय सिंह का दावा है कि अपना दामन बचाने के लिए सरकार कह रही है कि 6,90,000 रुपये की अनुमानित राशि बताई थी। बकौल संजय सिंह यह राशि 7-7.5 लाख तक हो सकती है, परंतु यह 19 लाख रुपये कैसे हो गई? इसी तरह 11,00,000 रुपये की कैटगिरी वाले फ्लैट के लिए डिमांड नोट 25,00,000 रुपये क्यों भेजा गया। इस दौरान संजय सिंह से केंद्र सरकार से सीधे सवाल किए हैं।
संजय सिंह के सवाल:
. जब केंद्रीय मंत्री को बीते साल 13 जुलाई को नोटिस मिल गया था तो वे झूठ क्यों बोल रहे हैं कि उन्हें 772 फ्लैट के बारे में कोई जानकारी नहीं?
. जब आप ने निर्माण कार्य संपूर्ण होने के बाद फ्लैट की कीमत 6,90,000 रखी तो आवेदन कर्ताओं को 19,00,000 रुपये का डिमांड नोट किस आधार पर भेजा?
जब आपने डीएलएफ से फ्लैट 8,22,000 में खरीदा और दूसरी श्रेणी का फ्लैट 9,98,000 का खरीदा तो 1900000 लाख और 2500000 अर्थात तीन गुनी कीमत क्यों मांगी?
केंद्रीय मंत्रालय ने दिए जवाब
केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्रालय की तरफ दिए जवाब में संजय सिंह के आरोपों को गलत बताया गया है। डीएलएफ की तरफ से तैयार 772 फ्लैट आवंटित कर दिए गए हैं। वहीं, 2017 की डीडीए बोर्ड की बैठक में दिल्ली सरकार के अधिकारी भी मौजूद थे। उस वक्त अधिकारियों ने कीमत पर आपत्ति जाहिर नहीं की। लोगों ने दो बार रजिस्ट्री चार्ज दिया है। पहला, डीएलएफ व दूसरा डीडीए को। वहीं, 2018 में डीडीए ने दिल्ली सरकार को एक पत्र लिखकर शुल्क में छूट देने की मांग की थी। लेकिन दिल्ली सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया। दूसरी तरफ 2011-2012 से नरेला, रोहिणी और द्वारका में तैयार 36,530 फ्लैट बीते सात साल से आवंटित नहीं हुआ है।