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मरने से पहले दान में दी त्वचा, दिल्ली के डॉक्टरों ने निकाली स्किन की चार परतें
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 03 Apr 2017 04:07 PM IST
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transplant skin
- फोटो : अमर उजाला
भारत में पहली बार दिल्ली के एक अस्पताल में मरे हुए व्यक्ति के शरीर से स्किन निकालकर नई त्वचा बनाई जाएगी। यह त्वचा एक 81 वर्षीय व्यक्ति के शरीर की है।
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81 वर्षीय रतिश मोहन वैश्य एक रिटायर्ड रक्षा अधिकारी थे। उन्होंने अपनी स्किन का अपनी मौत के बाद प्रत्यारोपण के लिए दान किया था। दिल्ली में सफदरजंग अस्पताल में अब शव पर त्वचा की कटाई का इलाज किया गया।
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सफदरजंग अस्पताल के बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. आरपी नारायण के अनुसार, शव की त्वचा और आँखें मौत के बाद छह घंटे के भीतर प्रत्यारोपण के लिए सबसे उपयुक्त है।
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उन्होंने बताया कि फोन कॉल मिलने के बाद, डॉक्टरों की टीम ने त्वचा को बाहर निकालना शुरू कर दिया। 'हमने पूरे शरीर को साफ किया और त्वचा की चार परतें बाहर निकाली गईं।
त्वचा का दान जले कटे या चोटों के निशान वाले मरीजों के लिए किया जाता है
transplant skin
- फोटो : अमर उजाला
त्वचा का दान जले कटे या चोटों के निशान वाले मरीजों के लिए किया जाता है। चूंकि मांग अधिक है और आपूर्ति बहुत कम है, इसलिए हम ऐसे लोगों को अधिक दान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
त्वचा को एक विशेष चिकित्सा उपकरण से बुना जाता है जिसे डर्माटोम कहा जाता है। प्रोफेसर नारायण ने कहा, 'हम शरीर से अधिक त्वचा निकालना चाहते थे लेकिन गुरुवार को उच्च तापमान के कारण शरीर ने मौत के बाद सामान्य कठोरता को विकसित करना शुरू कर दिया था।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार जब एक मृत शरीर से त्वचा हटा दी जाती है, तो इसे विशेष चिकित्सा तकनीकों के लिए पांच साल तक सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया जा सकता है।
सफदरजंग अस्पताल के निदेशक डॉ एके राय के अनुसार, धधिची देह दान समिति (अंग दान को बढ़ावा देने वाला एक संगठन) की मदद से हमारे अस्पताल में प्लास्टिक और एनाटॉमी सर्जन द्वारा उत्तर भारत में पहली बार त्वचा की कटाई की गई है।
त्वचा को एक विशेष चिकित्सा उपकरण से बुना जाता है जिसे डर्माटोम कहा जाता है। प्रोफेसर नारायण ने कहा, 'हम शरीर से अधिक त्वचा निकालना चाहते थे लेकिन गुरुवार को उच्च तापमान के कारण शरीर ने मौत के बाद सामान्य कठोरता को विकसित करना शुरू कर दिया था।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार जब एक मृत शरीर से त्वचा हटा दी जाती है, तो इसे विशेष चिकित्सा तकनीकों के लिए पांच साल तक सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया जा सकता है।
सफदरजंग अस्पताल के निदेशक डॉ एके राय के अनुसार, धधिची देह दान समिति (अंग दान को बढ़ावा देने वाला एक संगठन) की मदद से हमारे अस्पताल में प्लास्टिक और एनाटॉमी सर्जन द्वारा उत्तर भारत में पहली बार त्वचा की कटाई की गई है।