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कोर्ट ने गुड़िया के साथ हैवानियत करने वालों को ठहराया दोषी, 30 जनवरी को सुनाई जाएगी सजा

Sat, 18 Jan 2020 03:57 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhishek Singh Updated Sat, 18 Jan 2020 03:57 PM IST
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Delhi Court convicted two accused over Sexual Harassment case
court order - फोटो : court order

2012 में निर्भया के साथ हुई दरिंदगी के चार महीने बाद पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर इलाके में 5 वर्षीय गुड़िया के अपहरण और दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों को अदालत ने शनिवार को दोषी ठहराया। इन्होंने बच्ची के साथ अन्य अमानवीय कृत्य भी किए थे। डॉक्टरों ने 10 बार सर्जरी के बाद बच्ची की जान बचाई थी। कोर्ट ने दोषियों की सजा पर बहस के लिए 30 जनवरी की तारीख तय की है।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेश कुमार मल्होत्रा के समक्ष दोनों आरोपियों मनोज कुमार शाह और प्रदीप को पेश किया गया। अदालत ने फैसला सुनाने से पहले टिप्पणी की कि हमारे समाज में कई उत्सवों पर छोटी बच्चियों को मां दुर्गा के रूप में पूजा जाता है, लेकिन इस मामले में पीड़ित बच्ची ने असाधारण नीचता और अत्यधिक क्रूरता का अनुभव किया। इस वारदात के दौरान बच्ची के साथ असंगत और घिनौना व्यवहार किया गया। इसके बारे में पता लगने पर समाज की अंतरात्मा हिल गई थी। बच्ची के लिए यह घटना बेहद पीड़ादायक और भयानक रही है। कोर्ट दोनों आरोपियों को अपहरण और दुष्कर्म के लिए दोषी ठहराती है। दोषियों को सजा 30 जनवरी को सुनाई जाएगी।
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15 अप्रैल 2013 को 5 वर्षीय मासूम घर के पास खेलते समय गायब हुई थी। घंटों तक उसका पता न चला तो परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। करीब 40 घंटे बाद एक पड़ोसी ने पास ही रहने वाले मनोज के कमरे के अंदर से दरवाजा खटखटाने की आवाज सुनी। दरवाजा बाहर से बंद देख शक होने पर उसने बच्ची के माता-पिता को बताया था। पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़ा तो बच्ची बेहद नाजुक अवस्था में मिली। उसके नाजुक अंगों में बोतल और मोमबत्तियां मिलीं। स्तब्ध पुलिस कर्मियों ने बच्ची को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए 10 बार सर्जरी करनी पड़ी थी।

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बिहार से पकड़ में आए आरोपी

पुलिस के मुताबिक, दोनों हैवान बच्ची को मरा समझकर कमरे को बाहर से बंद करके फरार हो गए थे। उन्हें बिहार के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में पता चला कि मनोज ने बच्ची को खेलते हुए बहला-फुसलाकर अपने कमरे में बुलाया और बंधक बना लिया। इसके बाद उसने अपने साथी प्रदीप के साथ मिलकर बच्ची से दो दिन तक हैवानियत की।

कोर्ट से बाहर दोषी ने मीडिया कर्मियों पर किया हमला
दोषी ठहराए गए मनोज और प्रदीप को पुलिस जेल ले जा रही थी। कोर्ट परिसर में दोषियों ने वीडियो बनाते मीडिया कर्मियों पर हमला करके फोन छीनने की कोशिश की और गालियां दीं। इस बीच, एक दोषी ने महिला पत्रकार का हाथ पकड़कर उसे धक्का दे दिया। कई पुलिस कर्मियों केे सामने भी दोषी बेखौफ दिखे। पीड़ित महिला पत्रकार हमला करने वाले दोषी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सकती है।

7 साल बाद फैसले पर केजरीवाल ने कहा, ठीक करनी होगी व्यवस्था
अदालत के फैसले पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुड़िया रेप केस में दोनों आरोपियों को दोषी पाया गया। इसमें सात साल लग गए। हमें इस व्यवस्था को जल्द ठीक करना होगा। अगर हम चाहते हैं कि हमारी बहन-बेटियों के साथ हैवानियत की मानसिकता खत्म हो, तो दुष्कर्म से जुड़े मामलों में छह महीने में सजा दिलाने की व्यवस्था करनी होगी। 

गुड़िया मामले की क्रोनोलॉजी

. 15 अप्रैल, 2013: पांच साल की बच्ची को घर के बाहर से अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म, दोषी फरार
. 17 अप्रैल : अगवा होने के करीब 40 घंटे बाद बच्ची बरामद
. 20 अप्रैल : मामले में दोषी मनोज शाह को बिहार से किया गिरफ्तार
. 22 अप्रैल : दूसरा दोषी प्रदीप कुमार भी बिहार से गिरफ्तार
. 24 मई     : प्रदीप व मनोज के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने आरोप पत्र किया दाखिल
. 11 जुलाई : अदालत आरोपियों के खिलाफ नाबालिग से दुष्कर्म, अप्राकृतिक यौन संबंध, अपहरण, हत्या की कोशिश, साक्ष्य नष्ट करना तथा पोक्सो अधिनियम की धाराओं में तय किये थे आरोप। 
. 21 मार्च 2014 : प्रदीप ने खुद को नाबालिग बताते हुये हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 
. 12 अप्रैल 2017 : हाईकोर्ट ने प्रदीप को नाबालिग किया घोषित, केस को सुनवाई के लिये जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड भेजा
.  2018    : हाईकोर्ट ने प्रदीप के दावे की दोबारा पड़ताल करने का दिया निर्देश। निचली अदालत ने पड़ताल के बाद प्रदीप को बालिग घोषित किया। 
. 7 जनववरी 2020 : विशेष अदालत ने फैसला रखा सुरक्षित
. 18 जनवरी 2020 : प्रदीप व मनोज को दिया दोषी करार

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