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दिल्ली: अदालत ने नाबालिगों से दुष्कर्म के आरोपी को किया बरी, कहा- जातिगत घृणा के चलते उसे फंसाया गया

Fri, 13 Aug 2021 04:42 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 13 Aug 2021 04:42 PM IST
सार

जिला एवं सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा कि पर्याप्त सबूत इशारा करते हैं कि अनुसूचित जाति से आने वाले आरोपी के प्रति बच्चों के अभिभावकों का व्यवहार पक्षपातपूर्ण रहा और उसे इस मामले में फंसाया गया है।

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delhi court acquits rape accused of minors saying that he was trapped due to caste enmity
- फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिल्ली की एक अदालत ने नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के आरोपी को बरी करते हुए कहा कि बच्चों को उनके अभिभावकों ने बहुत कुछ सिखा रखा था। अदालत ने राज्य सरकार को यह निर्देश भी दिया है कि बरी किए गए शख्स को एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही यह भी कहा कि आरोपी को इसलिए रिहा किया जा रहा है क्योंकि इस बात के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि ‘जाति संबंधी घृणा’ के कारण ही उसे इस मामले में फंसाया गया है।

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जिला एवं सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा कि पर्याप्त सबूत इशारा करते हैं कि अनुसूचित जाति से आने वाले आरोपी के प्रति बच्चों के अभिभावकों का व्यवहार पक्षपातपूर्ण रहा और उसे इस मामले में फंसाया गया है।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा, ‘आपराधिक न्याय प्रणाली का हमारा अनुभव है कि लोग अनगिनत कारणों से झूठे आरोप लगाते हैं। इसमें जातिगत घृणा भी एक बड़ा कारण है और इस मामले में सबूत भी इस ओर इशारा करते हैं।
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मामला 2015 में बाल यौन अपराधों से संरक्षण (पोक्सो) कानून के तहत दर्ज करवाया गया था। आरोप था कि व्यक्ति ने अपने पड़ोसी की नाबालिग बेटियों का यौन उत्पीड़न किया है, आरोपी तभी से जेल में बंद था।


जिला न्यायाधीश ने कहा, हमारे समाज में, अच्छाई और बुराई के बीच सतत संघर्ष चलता रहता है और हम ऐसे दौर में रह रहे हैं, जहां पर समाज में नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है तथा कुछ भी संभव है।अदालत ने आरोपी को एक लाख रूपये की क्षतिपूर्ति दो महीने के भीतर देने का राज्य को निर्देश दिया। उन्होंने पुलिस की जांच को भी लचर बताया।

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