{"_id":"60b4b0ee8ebc3e139c347e04","slug":"delhi-corona-and-lockdown-break-the-back-of-urbanized-villagers","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली: कोरोना व लॉकडाउन ने शहरीकृत ग्रामीणों की कमर तोड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली: कोरोना व लॉकडाउन ने शहरीकृत ग्रामीणों की कमर तोड़ी
Mon, 31 May 2021 03:18 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Mon, 31 May 2021 03:18 PM IST
सार
- अधिकतर किराएदार चले जाने पर जिविका चलाने का संकट पैदा हुआ
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना महामारी एवं लॉकडाउन के कारण शहरीकृत गांवों के ग्रामीणों की आर्थिक तौर पर कमर टूट गई है। इनके यहां रहने वाले अधिक किराएदार अपने राज्य चले गए हैं, वहीं अभी कुछ रह रहे किराएदारों में से अधिकतर ने काम धंधा ठप होने का हवाला देते हुए किराया देने में हाथ खड़े कर दिए हैं। इस कारण अधिकतर ग्रामीणों के समक्ष अपनी जिविका चलाने का संकट पैदा हो गया है।
विज्ञापन
राजधानी में करीब 360 गांव हैं और उनमें से 225 गांव शहरीकृत घोषित किए जा चुके हैं। इन अधिकतर गांवों के ग्रामीणों की कृषि भूमि का सरकार ने वर्षों पहले कोड़ियों के भाव अधिग्रहण कर लिया। इतना ही नहीं, कृषि अधिग्रहण करने के दौरान सरकार न तो ग्रामीणों को नौकरी दी और न ही उनको कोई भी कारोबार करने का प्रशिक्षण दिया। इस कारण ग्रामीणों ने अपनी जिविका चलाने के लिए किराए का साधन पैदा करने के लिए लाल डोरा स्थित अपनी भूमि में मकान बना दिए।
विज्ञापन
राजधानी में सबसे वर्ष 1963 शहरीकृत घोषित किए गांवों की सूची में शामिल मुनिरका गांव के शांति स्वरूप बताते है कि उनके गांव के शत प्रतिशत ग्रामीणों की जिविका मकानों के किराए पर निर्भर है, मगर कोरोना की दूसरी लहर की दस्तक के साथ ही अधिकतर ग्रामीणों के मकानों में रहने वाले किराएदार चले गए हैं।
विज्ञापन
वहीं सैयद नांगलाई गांव निवासी थानसिंह यादव के अनुसार उनके गांव में कुछ ही किराएदार बचे हैं, लेकिन वे किराया नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि काम धंधा ठप हो गया है। इस कारण उनके समक्ष खाने के लाले पड़ गए है। वे अपना किराया माफ करने की मांग कर रहे है। लिहाजा ग्रामीणों की आय बंद हो गई है और उनके समक्ष जीविका चलाने का संकट पैदा होना शुरू हो गया है।
दूसरी ओर नांगलोई निवासी कृष्णपाल गहलोत ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में ग्रामीण भी आए गए और किराए की आय बंद होने के बीच उन्हें अपना इलाज कराने के दौरान पैसों की दिक्कत आ गई। ऐसे बहुत से ग्रामीणों ने अपने रिश्तेदारों से पैसे उधार मांग इलाज कराना पड़ा।
ग्रामीणों की सहायता के लिए भी पैकेज का एलान हो : चौ. तारीफ सिंह
नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के पूर्व सांसद चौ. तारीफ सिंह का कहना है कि दिल्ली सरकार ने ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार ने भी दिल्ली के ग्रामीणों की ओर ध्यान देना चाहिए। उनकी मदद के लिए दोनों सरकार विशेष पैकेज का ऐलान करें, क्योंकि कृषि भूमि नहीं रहने और नौकरी पेशा के अभाव में ग्रामीणों की जिविका एक मात्र मकानों का किराया ही साधन है और कोरोना की दस्तक के बाद गत सवा साल से उनकी यह आय भी खत्म हो गई है।