पीटीएम में केजरीवाल बोले- अब सरकारी स्कूलों में दाखिले की लगती है सिफारिश
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए भी अब सिफारिश लगवाई जाती है। बेहतर व गुणवत्ता युक्त शिक्षा के चलते दिल्लीवासी अपने बच्चों का नाम निजी स्कूलों से कटवाकर सरकारी स्कूलों में भेज रहे हैं।
शनिवार को सरकारी स्कूलों की मेगा पीटीएम में अभिभावकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अब लोग अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में पढ़ाने पर शर्माते नहीं हैं, बल्कि शान से बताते हैं कि वह दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़ता है। अब एनसीआर से भी अभिभावक सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए दिल्ली की ओर रुख कर रहे हैं।
दीनदयाल मार्ग स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय में आयोजित मेगा पीटीएम में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और अभिभावकों से सरकारी स्कूलों में अधिक सुविधाएं जोड़ने, शिक्षा में बदलाव और अन्य मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि पहले निम्न व मध्य वर्गीय परिवारों के अभिभावक बच्चों को निजी स्कूल में दाखिला दिलाने का सपना देखते थे, ताकि वे पढ़-लिखकर अच्छे मुकाम पर पहुंच सकें। इनके महंगे होने के चलते सभी अपना सपना पूरा नहीं कर पाते थे। अब उनका यह सपना सरकारी स्कूलों में भी पूरा हो रहा है।
अभिभावकों से उन्होंने आग्रह किया कि नियमित पीटीएम में आएं और शिक्षक से बच्चे की कमियों पर बात करें, ताकि सुधार हो सके। इससे वे यह नजर भी रख सकेंगे कि बच्चा गलत रास्ते पर तो नहीं जा रहा है।
मनीष सिसोदिया ने क्या कहा?
इससे पहले, उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पीटीएम बच्चों के सर्वांगीण विकास की जानकारी अभिभावकों तक पहुंचाने का माध्यम है। इसलिए इससे जुड़े रहें। स्कूल में उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत आती है तो सीधे उनसे शिकायत कर सकते हैं। पीटीएम के बाद उपमुख्यमंत्री ने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल पोचनपुर, स्कूल ऑफ एक्सीलेंस सेक्टर-22 द्वारका व सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-2 द्वारका का दौरा भी किया।
अभिभावकों ने भी रखे अनुभव
सुप्रीम कोर्ट के वकील गौरव यादव ने कहा कि उनके दो बच्चे हैं। उन्होंने साहिबाबाद में घर बनाया है। उनका बेटा वहां नहीं पढ़ना चाहता था। पहले हिंदी भी नहीं बोल पाता था, पर अब अंग्रेजी में बात करता है। स्कूल में अच्छे वातावरण से बच्चों का विकास हो रहा है। एक अन्य अभिभावक मोहम्मद आसिफ ने कहा कि उनका बेटा 9वीं में है। निजी स्कूल में फीस अत्यधिक होती थी। इससे घर खर्च में दिक्कत आती थी। अब बेटा सरकारी स्कूल में है तो बेहतर शिक्षा तो है, पर महंगी फीस नहीं देनी पड़ती।
शिक्षकों ने कहा, पीटीएम से सुधरा रिजल्ट
शिक्षकों ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पहले पीटीएम नहीं होती थी। इससे बच्चों की जानकारी अभिभावकों तक पहुंचाना मुश्किल होता था। इस प्लेटफार्म पर वे सीधे अभिभावकों से मिल पाते हैं। इसी कारण सरकारी स्कूलों का रिजल्ट सौ फीसदी पहुंच गया है। अब हमारे बच्चे आईआईटी, मेडिकल में चयनित हो रहे हैँ।