मुख्य सचिव मामला: कोर्ट ने इस साक्ष्य को देख माना कि AAP मंत्री इमरान हुसैन पर हुआ था जानलेवा हमला
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अदालत ने माना कि मुख्य सचिव मारपीट मामले के मुद्दे को लेकर खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन पर सचिवालय में हमला किया गया था।
अदालत ने कहा सीसीवीटी फुटेज से स्पष्ट है कि इमरान जब अपने आफिस पंहुचे तो उन पर झुंड में शामिल लोगों ने जानलेवा हमला किया था। वे अपनी आफिसियल डयूटी कर रहे थे ऐसे में यह गंभीर मामला है।
अदालत ने पुलिस को इमरान की सुरक्षा व्यवस्था करने के अलावा सीसीटीवी फुटेज संभाल कर रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने माना यह अहम साक्ष्य है।
तीस हजारी स्थित मेट्रोपोलिटन मैजिस्ट्रेट अभिलाष मल्होत्रा ने इमरान की याचिका पर सुनवाई करते हुए आईपी एस्टेट थाने के एसएचओ को निर्देश दिया कि वह उस जगह का फुटेज सुरक्षित रखने के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाएं, जहां पर यह घटना हुई। हुसैन की ओर से कोर्ट को हमले से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज दिखाई गई थी, जिस पर यह आदेश आया।
अदालत ने सीसीटीवी फुटेज देखने से पृथम दृष्टया साफ है कि मंत्री को लिफ्ट में रोक कर रखा गया, भारी भीड़ जमा थी और बल का इस्तेमाल भी हुआ। यह सीसीटीवी फुटेज मौजूदा मामले में एक अहम सबूत है।
इस पर कोई विवाद नहीं है कि सीसीटीवी फुटेज आम तौर पर अपने आप डिलीट हो जाती है और लिमिटेड पीरियड के लिए ही स्टोर रहती है। इसीलिए संबंधित फुटेज को सुरक्षित रखने और जब्त करने की बहुत जरूरत है, जरूरत पड़े तो डिवाइस को भी सुरक्षित रखा जाए।
हुसैन की ओर से एडवोकेट बीएस जून ने कोर्ट मे कहा कि मामले में सिर्फ हल्की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया जबकि संबंधित वीडियो से साफ है कि मंत्री पर ये हमला उस वक्त हुआ जब वह अपनी आधिकारिक जिम्मेदारी निभाने के लिए अपने ऑफिस जा रहे थे। इसीलिए मामले में आईपीसी की धारा 186,353,332 भी लगना चाहिए।
ये धाराएं सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा पहुंचाना, सरकारी कर्मचारी को अपनी जिम्मेदारी निभाने से रोकने के लिए बल का प्रयोग, और ऐसा जानबूझकर करने से जुड़ी हैं। सुनवाई के दौरान याची मंत्री की ओर से अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई।
इस पर कोर्ट ने संबंधित इलाके के डीसीपी को निर्देश दिया कि वह मंत्री की सुरक्षा के मुद्दे का आंकलन करे और उसके हिसाब से मंत्री को सुरक्षा मुहैया कराए। पुलिस को 8 मार्च तक इन आदेशों की कंप्लायंस रिपोर्ट देनी है।