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दिल्ली कैबिनेट ने लिये तीन अहम फैसले, एमसीडी के अलावा आम जनता को होगा फायदा
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 20 Jul 2016 08:52 AM IST
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केजरीवाल और मनीष सिसोदिया
- फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट ने तीन अहम फैसले किए। पहले फैसले में पात्रता पूरी नहीं करने के बावजूद एमसीडी को नगर सुधार कोष में 374 करोड़ रुपये जारी करने का फैसला किया, तो दूसरा फैसला आम आदमी के होटल या गेस्ट हाउस को विलासिता कर से बाहर करने का किया।
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अब दैनिक 1500 रुपये से कम किराए वाले कमरे में 15 फीसदी का विलासिता कर नहीं देना होगा। तीसरा फैसला दिल्ली सरकार में खातों की सही जांच हो सके इसके लिए लेखा निदेशालय के 84 पदों को मंजूरी दी।
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फैसला नंबर-1 तीनों एमसीडी को मिलेंगे 374 करोड़
दिल्ली कैबिनेट ने मंगलवार को नगर सुधार कोष में वित्त वर्ष 2015-16 के लिए तीनों एमसीडी को 374 करोड़ जारी करने का फैसला किया है। हालांकि दो एमसीडी नगर सुधार कोष के लिए शर्तें पूरी नहीं कर रहे हैं। सरकार का तर्क है कि वित्तीय स्थिति खराब होने की वजह से एक वर्ष के लिए शर्तों में छूट दी गई है।
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दैनिक 1499 रुपये किराए के कमरे पर नहीं लगेगा विलासिता कर
केजरीवाल और मनीष सिसोदिया
दिल्ली सरकार के अनुसार उत्तर एमसीडी को 145 करोड़, पूर्वी एमसीडी को 110 करोड़ और दक्षिण एमसीडी को 118 करोड़ रुपये शहरी विकास विभाग की तरफ से तय फॉर्मूले के तहत दिए जाएंगे। सरकार का कहना है कि एमसीडी के कर्मचारियों की वित्तीय कठिनाइयां इससे दूर होंगी।
वित्त आयोग की सिफारिशों के हिसाब से हिस्से के बटवारे में 50 फीसदी वेटेज जनसंख्या, 25 फीसदी क्षेत्रफल और 25 फीसदी जनसंख्या घनत्व को दिया गया है।
दिल्ली सरकार के अनुसार पिछले सात साल में सिर्फ दो बार नगर सुधार कोष के तौर पर राशि एमसीडी को जारी की गई है। वित्त वर्ष 2013-14 और 2014-15 में भी नगर सुधार कोष में राशि नहीं दी गई है। दिल्ली सरकार के फैसले को एमसीडी में अगले वर्ष होने वाले चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
फैसला नंबर-2. आम आदमी के गेस्ट हाउस को विलासिता कर से छूट
-दैनिक 1499 रुपये किराए के कमरे पर नहीं लगेगा विलासिता कर
-अभी तक 749 रुपये दैनिक किराए पर थी छूट
दिल्ली कैबिनेट ने आम आदमी के दायरे वाले गेस्ट हाउस के कमरों को विलासिता कर के बंधन से मुक्त करने का फैसला किया है। राजधानी में किसी भी होटल या गेस्ट हाउस में कमरे का दैनिक किराया 1500 रुपये से कम है तो उस पर अब विलासिता कर (15 फीसदी) नहीं देना पड़ेगा। अभी तक दैनिक किराया 749 रुपये तक होने पर ही छूट है।
वित्त आयोग की सिफारिशों के हिसाब से हिस्से के बटवारे में 50 फीसदी वेटेज जनसंख्या, 25 फीसदी क्षेत्रफल और 25 फीसदी जनसंख्या घनत्व को दिया गया है।
दिल्ली सरकार के अनुसार पिछले सात साल में सिर्फ दो बार नगर सुधार कोष के तौर पर राशि एमसीडी को जारी की गई है। वित्त वर्ष 2013-14 और 2014-15 में भी नगर सुधार कोष में राशि नहीं दी गई है। दिल्ली सरकार के फैसले को एमसीडी में अगले वर्ष होने वाले चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
फैसला नंबर-2. आम आदमी के गेस्ट हाउस को विलासिता कर से छूट
-दैनिक 1499 रुपये किराए के कमरे पर नहीं लगेगा विलासिता कर
-अभी तक 749 रुपये दैनिक किराए पर थी छूट
दिल्ली कैबिनेट ने आम आदमी के दायरे वाले गेस्ट हाउस के कमरों को विलासिता कर के बंधन से मुक्त करने का फैसला किया है। राजधानी में किसी भी होटल या गेस्ट हाउस में कमरे का दैनिक किराया 1500 रुपये से कम है तो उस पर अब विलासिता कर (15 फीसदी) नहीं देना पड़ेगा। अभी तक दैनिक किराया 749 रुपये तक होने पर ही छूट है।
84 अतिरिक्त ऑडिट अधिकारियों के पदों को मंजूरी
केजरीवाल
- फोटो : ani
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के शासनकाल में गेस्ट हाउस में 750 रुपये तक के किराए को विलासिता कर के दायरे में लगाया गया था। अब 1500 रुपये या उससे अधिक दैनिक किराया वसूली वाले कमरे में रुकने पर ही विलासिता कर चुकाना होगा। तर्क है कि राजधानी में आने वाले आम पर्यटक ही 1500 रुपये दैनिक से कम किराए का कमरा लेते हैं।
फैसला नंबर-3
84 अतिरिक्त ऑडिट अधिकारियों के पदों को मंजूरी
दिल्ली कैबिनेट ने विभागों के खर्च पर पैनी नजर रखने के लिए लेखा निदेशालय में 84 अतिरिक्त ऑडिट अधिकारियों के पदों को मंजूरी दी है। अभी लेखा निदेशालय में अधिकारियों की कमी की वजह से दिल्ली सरकार के आंतरिक ऑडिट में देरी होती थी।
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट ने तय किया है कि लेखा निदेशालय में 84 नए पदों के सृजन के साथ ही जल्द से जल्द इसे भरा जाए। ताकि विभागों के सही खर्च का आकलन समय पर किया जा सके। अगर गड़बड़ी है तो केंद्रीय संस्था नियंत्रक एवं लेखा परीक्षक की लेखा परीक्षा होने के पहले उसे पकड़ा जा सके।
फैसला नंबर-3
84 अतिरिक्त ऑडिट अधिकारियों के पदों को मंजूरी
दिल्ली कैबिनेट ने विभागों के खर्च पर पैनी नजर रखने के लिए लेखा निदेशालय में 84 अतिरिक्त ऑडिट अधिकारियों के पदों को मंजूरी दी है। अभी लेखा निदेशालय में अधिकारियों की कमी की वजह से दिल्ली सरकार के आंतरिक ऑडिट में देरी होती थी।
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट ने तय किया है कि लेखा निदेशालय में 84 नए पदों के सृजन के साथ ही जल्द से जल्द इसे भरा जाए। ताकि विभागों के सही खर्च का आकलन समय पर किया जा सके। अगर गड़बड़ी है तो केंद्रीय संस्था नियंत्रक एवं लेखा परीक्षक की लेखा परीक्षा होने के पहले उसे पकड़ा जा सके।