फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi cabinet has approved make 22 commercial and 18 permanent fast track courts

दिल्ली कैबिनेट ने 22 वाणिज्यिक और 18 स्थायी फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की दी मंजूरी

Sat, 27 Jul 2019 06:44 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 27 Jul 2019 06:44 AM IST
विज्ञापन
Delhi cabinet has approved make 22 commercial and 18 permanent fast track courts
फाइल फोटो
शुक्रवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई दिल्ली कैबिनेट की बैठक में राजधानी में  22 वाणिज्यिक कोर्ट और 18 स्थायी फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के कानून विभाग के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया। इसके लिए जजों की नियुक्ति के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है।
विज्ञापन


वाणिज्यिक कोर्ट के लिए कानून विभाग का प्रस्ताव था कि दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा से 22 जिला जजों की भर्ती होनी है। इनके लिए 212 अधीनस्थ स्टाफ की भी जरूरत है। इससे दिल्ली सरकार पर हर साल 13.55 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च पड़ेगा। 
विज्ञापन


इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते जनवरी में जिला जज स्तर के 22 पदों का सृजन करने की सूचना दिल्ली सरकार को दी थी। इनकी भर्ती दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा से होगी। वाणिज्यिक अदालत कानून-2015 के तहत बनने वाली ये अदालतें वाणिज्यिक विवादों को निपटाएंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


दूसरी तरफ, कानून विभाग ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की 90 फीसदी अस्थायी नियुक्तियों को स्थायी करने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसमें 18 अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के पद दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा से भरे जाने हैं। 

वहीं, 86 पद अधीनस्थ स्टाफ के थे। नए पदों के भरने पर दिल्ली सरकार को सालाना 8.88 करोड़ से ज्यादा का खर्च करना पड़ेगा। दिल्ली कैबिनेट ने कानून विभाग के दोनों प्रस्तावों को मंजूर कर लिया है।

वित्त आयोग से नहीं मिला फंड
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि 11वें वित्त आयोग ने संविधान की धारा 275 के तहत देशभर में 1734 अदालतें गठित करने के लिए 502 करोड़ रुपये का आवंटन किया था। इसमें दिल्ली में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं था। 

हालांकि, दिल्ली सरकार ने इस मसले को केंद्रीय कानून मंत्रालय के सामने उठाया था। उधर, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2003-04 में गैरयोजनागत अनुदान के तौर पर फंड जारी किया था। इससे 20 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनानी थीं।

12वें वित्त अयोग ने भी फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए कोई फंड दिल्ली को आबंटित नहीं किया। ऐसी हालत में फास्ट ट्रैक कोर्ट के 20 जजों व 95 अधीनस्थ स्टाफ की अस्थायी तौर पर नियुक्ति की गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed