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Delhi: कोतवाली इलाके में बसों ने ली सबसे ज्यादा लोगों की जान, इस क्षेत्र में साइकिल सवारों की अधिक मौत
Sun, 02 Apr 2023 08:45 AM IST
शाहरुख खान
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 02 Apr 2023 08:45 AM IST
सार
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि राजधानी के कोतवाली इलाके में पिछले चार वर्षों में बसों ने सबसे ज्यादा 20 लोगों की जान ली है।
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हादसे का शिकार डीटीसी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
राजधानी के कोतवाली इलाके में पिछले चार सालों में बसों ने सबसे ज्यादा 20 लोगों की जान ली। इस इलाके में सबसे ज्यादा बस दुर्घटनाएं हुईं। इसके बाद लाजपत नगर, पहाड़गंज व संसद मार्ग थाना इलाका आता है। वर्ष 2021 के मुकाबले वर्ष 2022 में बसों से हुई सड़क दुर्घटनाओं में 41 फीसदी की वृद्धि हुई है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। अब ट्रैफिक पुलिस इस बात का अध्ययन करवा रही है कि कोतवाली इलाके में ही सबसे ज्यादा बस दुर्घटनाएं क्यों रही हैं। इसके पीछे क्या कारण हैं, ताकि इनसे निजात के उपाय किए जा सकें।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष 2020 में बसों से हुई दुर्घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या में 37 फीसदी और घातक दुर्घटनाओं में 38.5 फीसदी की कमी आई थी। वर्ष 2019 में हुई सड़क दुर्घटनाओं में बसों ने 98 लोगों की जान ली थी और 347 लोग घायल हुए थे।
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2021 में बसों ने 71 लोगों की जान ली
वर्ष 2020 में बसों ने 62 लोगों की जान ली थी और 231 लोग घायल हुए थे। वर्ष 2019 में 96 घातक बस दुर्घटनाएं हुई थीं। वहीं, वर्ष 2020 में 59 घातक दुर्घटनाएं हुई थीं। वर्ष 2021 में बसों ने 71 लोगों की जान ली थी और 223 लोगों को घायल किया था।
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दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। अब ट्रैफिक पुलिस इस बात का अध्ययन करवा रही है कि कोतवाली इलाके में ही सबसे ज्यादा बस दुर्घटनाएं क्यों रही हैं। इसके पीछे क्या कारण हैं, ताकि इनसे निजात के उपाय किए जा सकें।
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दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष 2020 में बसों से हुई दुर्घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या में 37 फीसदी और घातक दुर्घटनाओं में 38.5 फीसदी की कमी आई थी। वर्ष 2019 में हुई सड़क दुर्घटनाओं में बसों ने 98 लोगों की जान ली थी और 347 लोग घायल हुए थे।
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2021 में बसों ने 71 लोगों की जान ली
वर्ष 2020 में बसों ने 62 लोगों की जान ली थी और 231 लोग घायल हुए थे। वर्ष 2019 में 96 घातक बस दुर्घटनाएं हुई थीं। वहीं, वर्ष 2020 में 59 घातक दुर्घटनाएं हुई थीं। वर्ष 2021 में बसों ने 71 लोगों की जान ली थी और 223 लोगों को घायल किया था।
2022 में बसों ने ली 38 फीसदी ज्यादा लोगों की जान
वर्ष 2021 के मुकाबले 2022 में बसों ने 38 फीसदी ज्यादा लोगों की जान ली। वर्ष 2021 में 66 तो वर्ष 2022 में 93 घातक बस दुर्घटनाएं हुई हैं। घातक बस दुर्घटनाओं में 41 फीसदी की वृद्धि हुई है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि अगर बस से हुई सड़क दुर्घटनाओं को क्षेत्रवार के हिसाब से तुलना करते तो वर्ष 2019 में कोतवाली, जहांगीरपुरी और पहाड़गंज क्षेत्र में सबसे ज्यादा हुईं।
वर्ष 2020 और 2021 में कोतवाली और लाजपत नगर इलाके में सबसे ज्यादा बस दुर्घटनाएं हुई। वर्ष 2022 में कोतवाली, लाजपत नगर और सिविल लाइंस क्षेत्र में सबसे ज्यादा बस हादसे हुए हैं।
कोतवाली इलाके में ही सबसे ज्यादा बस दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसे लेकर अध्ययन करवाया जा रहा है। हालांकि, शुरुआती जांच में ये बात सामने आई है कि सलीमगढ़ बाइपास व अन्य सड़कों पर वाहन तेज गति से चलते हैं। यहां से दूसरे राज्यों से आने वाले वाहन भी गुजरते हैं। यहां पर रफ्तार कंट्रोल करने के इंतजाम किए जा रहे हैं।
-एसएस यादव, विशेष पुलिस आयुक्त, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस
-एसएस यादव, विशेष पुलिस आयुक्त, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस
बवाना में सबसे ज्यादा साइकिल सवारों की मौत
बवाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा साइकिल सवारों की मौत हुई है। क्षेत्र में सबसे ज्यादा साइकिल सवारों की मौतें हुईं। वहीं, वर्ष 2022 में बवाना, वसंतकुंज और बदरपुर में सबसे ज्यादा साइकिल सवारों की मौत हुई थी। वर्ष 2021 में 45 साइकिल सवारों की मौत व 123 घायल हुए। वर्ष 2022 में 48 साइकिल सवारों की मौत 134 घायल हुए थे।
बवाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा साइकिल सवारों की मौत हुई है। क्षेत्र में सबसे ज्यादा साइकिल सवारों की मौतें हुईं। वहीं, वर्ष 2022 में बवाना, वसंतकुंज और बदरपुर में सबसे ज्यादा साइकिल सवारों की मौत हुई थी। वर्ष 2021 में 45 साइकिल सवारों की मौत व 123 घायल हुए। वर्ष 2022 में 48 साइकिल सवारों की मौत 134 घायल हुए थे।