निगम कर्मचारी की मौत पर भड़के सतीश उपाध्याय
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दक्षिण दिल्ली नगर निगम में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। बहुत से विभाग हैं, जिनमें हो रहे भ्रष्टाचार के बारे में पार्षदों को भी पता नहीं है। रिश्वत के मामले भी कम सामने नहीं आ रहे।
ये बातें आम पार्षद या विपक्षी दल के पार्षदों ने नहीं कहीं, बल्कि स्थायी समिति के अध्यक्ष और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने समिति की बैठक में आरोप लगाए।
बृहस्पतिवार को स्थायी समिति की बैठक में विपक्ष के नेता फरहाद सूरी ने भ्रष्टाचार से परेशान होकर एक सफाई कर्मचारी के आग लगाकर आत्महत्या करने का मुद्दा उठाया तो सतीश उपाध्याय खुद को रोक नहीं पाए।
रिश्वत नहीं दे पाया तो की खुदकुशी
उन्होंने माना कि नगर निगम में हर जगह भ्रष्टाचार है और बहुत से विभागों में जमकर रिश्वत ली जाती है, लेकिन इस बारे में किसी को मालूम नहीं है। उन्होंने आयुक्त को निर्देश दिए कि निगम को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों को सख्ती से लागू करें और उनकी लगातार प्रगति रिपोर्ट दें।
इससे पहले फरहाद सूरी ने कहा कि खुदकुशी करने वाले सफाई कर्मचारी फूलचंद को नियमित करने के लिए सफाई विभाग के अधिकारी 60 हजार रुपये मांग रहे थे।
इससे परेशान होकर उसने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्महत्या कर ली। इससे जाहिर हो रहा है कि नगर निगम में किस कदर भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
मुआवजा और नौकरी देगा निगम
दक्षिणी दिल्ली निगम के मेयर खुशीराम ने खुदकुशी करने वाले सफाई कर्मचारी फूलचंद के परिजनों को महापौर फंड से पांच लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की।
साथ ही स्थायी समिति के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने मृतक के पुत्र को स्थायी सफाई कर्मचारी के रूप में नियुक्त करने के आदेश दिए।
वहीं, विपक्ष के नेता फरहाद सूरी ने कहा कि कांग्रेस के सभी पार्षद सदन की अगली बैठक में मिलने वाले भत्ते की राशि फूलचंद के परिजनों को देंगे। आयुक्त मनीष गुप्ता ने भी कार्यकारी पक्ष की ओर से उन्हें आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया।
पार्षदों ने अधिकारियों पर लगाया आरोप
दक्षिणी निगम के पार्षदों को निगम के अधिकारियों का विधायकों और सांसदों के साथ दौरे पर जाना नागवार गुजर रहा है। इतना ही नहीं, विधायकों को विकास कार्य करने के लिए नगर निगम से फंड देने पर भी पार्षदों में नाराजगी है।
इस मसले को लेकर बृहस्पतिवार को स्थायी समिति की बैठक में चर्चा हुई। विपक्षी नेता फरहाद सूरी ने कहा कि निगम के अधिकारी पार्षदों को समय नहीं देते और विधायकों-सांसदों के साथ दौरे में घूम रहे हैं।
दिल्ली सरकार के विभागों के अधिकारी पार्षदों के फोन तक नहीं सुनते। निगम के अधिकारी विकास कार्यों के लिए विधायकों को फंड देने में कोई देरी नहीं करते, जबकि पार्षदों को चक्कर लगवाते हैं। इस पर समिति अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने निर्देश दिया कि निगम अधिकारी पार्षदों को प्राथमिकता देंगे।