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Delhi : आयुष्मान योजना के दायरे से बाहर हैं दिल्ली के बड़े अस्पताल, नुकसान उठाकर शामिल होने को नहीं तैयार

Mon, 09 Jun 2025 03:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 09 Jun 2025 03:06 AM IST
सार

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में करीब 60 अस्पताल इस योजना के तहत सुविधा दे रहे हैं। इनमें ज्यादातर छोटे व मध्यम स्तर के अस्पताल या नर्सिंग होम शामिल हैं।

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Delhi: Big hospitals of Delhi are outside the scope of Ayushman Yojana
demo - फोटो : Freepik

विस्तार

दिल्ली में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान योजना) को लागू हुए दो माह का समय पूरा हो गया है। इसके बावजूद अभी तक दिल्ली के बड़े अस्पताल इस योजना के दायरे से बाहर हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में करीब 60 अस्पताल इस योजना के तहत सुविधा दे रहे हैं। इनमें ज्यादातर छोटे व मध्यम स्तर के अस्पताल या नर्सिंग होम शामिल हैं।

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दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, राजधानी में एक हजार से अधिक निजी अस्पताल व नर्सिंग होम पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकतर अस्पताल व नर्सिंग होम योजना में शामिल होने से बच रहे हैं। निजी अस्पतालों का कहना है कि योजना के तहत इलाज के बदले किए जा रहे भुगतान का शुल्क काफी कम है। शुल्क का भुगतान लंबे समय तक नहीं हो पा रहा। इस योजना के तहत सर्जरी सहित अन्य के लिए जो शुल्क तय हैं उससे मध्यम स्तर के अस्पताल का खर्च नहीं निकल पाता है। ऐसे में कोई भी अस्पताल नुकसान के साथ योजना में शामिल होने के पक्ष में नहीं है।
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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह का दावा है कि इस योजना के तहत दिल्ली के फाइव स्टार अस्पतालों में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा दी जाएगी। नेशनल मेडिकल फोरम और दिल्ली अस्पताल फोरम के अध्यक्ष डॉ. प्रेम अग्रवाल का कहना है कि यह योजना काफी अच्छी है, लेकिन इसके शुल्क और भुगतान को लेकर सरकार को विचार करना चाहिए। निजी अस्पताल इस योजना में शामिल होने के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार को उनका सहयोग करना चाहिए। नियमों में सुधार करना चाहिए। उनका दावा है कि सरकारी तंत्र ने नियमों का बंधन लगाकर दिल्ली के निजी अस्पतालों से आठ हजार बिस्तर घटा दिए हैं। जबकि योजना को प्रभावी बनाने के लिए बिस्तर बढ़ाने की जरूरत है। दिल्ली की जनसंख्या को देखते हुए निजी और सरकारी अस्पतालों में एक लाख बिस्तर की जरूरत है।
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एक साल से नहीं मिला पैसा : निजी अस्पतालों का कहना है कि दूसरे राज्यों का अनुभव है कि जिन अस्पतालों ने योजना के तहत इलाज किया। उन्हें एक साल से भुगतान नहीं हुआ। अस्पतालों का कहना है कि इस योजना के तहत निजी अस्पतालों को काफी कम भुगतान होता है।

सरकार का दावा : मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक दिल्ली के 83 अस्पताल में योजना का लाभ मिल रहा है। इसमें 59 निजी और 24 सरकारी अस्पताल हैं। इसके अलावा देशभर के पंजीकृत अस्पताल में भी मरीज इलाज करवा सकते हैं। दिल्ली में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 330369 लाभार्थियों का जबकि वय वंदना योजना के तहत 154116 वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण किया जा गया है। योजना के तहत दिल्ली में अभी तक 729 लोग लाभ उठा चुके है।


ओपीडी की सुविधा नहीं 
आयुष्मान योजना में ओपीडी व बीमारी की पहचान से पहले के इलाज की सुविधा नहीं है। इस योजना में शामिल होने से पहले मरीज को बीमारी की पहचान कराना जरूरी है। पहचान के बाद निजी अस्पताल को आयुष्मान के पोर्टल पर आवेदन करना होगा। यदि उक्त बीमारी योजना में कवर होगी तो मरीज को अस्पताल में इलाज की सुविधा मिल पाएगी। ओपीडी में इलाज के दौरान कार्ड से मरीज जांच करने की मांग करते हैं, जबकि योजना में भर्ती होने के बाद ही सुविधा दी जा सकती है। कैंसर सहित दूसरी गंभीर मरीज की पहचान के लिए मरीज को निजी अस्पतालाें में काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। 
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