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दिल्ली में अब विस चुनाव आने वाले हैं!

Sat, 17 May 2014 01:01 PM IST
Updated Sat, 17 May 2014 01:01 PM IST
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Delhi assembly election probability increased as BJP came in power

मोदी लहर में भाजपा ने केंद्र में परचम लहराया तो अब दिल्ली में राष्ट्रपति शासन के दिन खत्म होने की संभावनाएं बढ़ गईं। इस लहर के सहारे भाजपा दिल्ली में जल्द विधानसभा चुनाव कराकर पूर्ण बहुमत पाने की कोशिश करेगी।

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अक्तूबर में हरियाणा विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं। इसी के साथ भाजपा दिल्ली में विधानसभा चुनाव कराना चाहेगी। पूरे देश में शानदार प्रदर्शन के बाद अब भाजपा के हौसले बुलंद हैं तो ऐसे में भाजपा चाहेगी कि इसका फायदा दिल्ली के विधानसभा चुनावों में भी उठाया जाए।
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भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के बाद तो यही लगता है कि अगर आज चुनाव हों तो उसका अच्छा फायदा बीजेपी को मिल सकता है। कहीं न ये बात बीजेपी के अंदर भी होगी ऐसे में संभावना है कि मोदी के प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभाल लेने के बाद दिल्ली के विधानसभा चुनाव कराने की कवायद शुरू हो।
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14 फरवरी से लगा है राष्ट्रपति शासन

Delhi assembly election probability increased as BJP came in power

49 दिन सरकार चलाने के बाद जब 14 फरवरी को अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दिया था, उसके एक सप्ताह बाद से दिल्ली में राष्ट्रपति शासन है। नजीब जंग को कांग्रेस ने उपराज्यपाल बनाया है।

ऐसे में उपराज्यपाल की कुर्सी को लेकर भी भाजपा नेताओं के बीच चर्चा होने लगी है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को दिल्ली में 46 फीसदी वोट मिले हैं और ‘आप’ को 33 फीसदी। जबकि कांग्रेस को सिर्फ 15 फीसदी।

इस रिजल्ट को देखते हुए न सिर्फ भाजपा बल्कि आम आदमी पार्टी भी नए सिरे से चुनावी समर में जाना चाहेगी। वजह साफ है कि भाजपा को मोदी लहर से तो ‘आप’ को अल्पसंख्यक वोट के सहारे विधानसभा चुनाव में फायदा होता दिख रहा है।

आप और भाजपा में रहेगी टक्कर!

Delhi assembly election probability increased as BJP came in power

राजनीतिक विश्लेषक व ‘आप’ के उत्तर पूर्वी दिल्ली प्रत्याशी प्रो. आनंद कुमार का कहना है कि मतदान प्रतिशत बढ़ने से जाहिर है कि सत्ता विरोधी वोट पड़े।

‘आप’ दूसरे नंबर की पार्टी बन गई है। अब पार्टी की नैतिक व राजनीतिक जिम्मेदारी भी विस चुनाव में जाने की बनती है। भाजपा के तीन विधायक सांसद बन गए हैं तो उसके पास भी संख्याबल कम हो गई है। लोकसभा के रिजल्ट से भाजपा का पलड़ा भारी हुआ है।

वह तुरंत विधानसभा चुनाव चाहेगी नहीं तो केन्द्र सरकार के तीन महीने के काम का प्रभाव अगले चुनाव पर पड़ेगा। अगले तीन महीने में गैस कीमत और दिल्ली में बिजली कंपनियों के खिलाफ निपटने की नीति पर भी भाजपा का वोट बैंक तय होगा।

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