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दिल्ली विधानसभा चुनावः तीनों पार्टियां तैयार कर रहीं रणनीति, इस मुद्दे पर रहेगा जोर
Tue, 07 Jan 2020 02:36 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 07 Jan 2020 02:36 AM IST
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आप, कांग्रेस, बीजेपी
- फोटो : सोशल मीडिया
विधानसभा चुनावों का एलान होने के साथ आप, भाजपा और कांग्रेस ने मतदाताओं को रिझाने के लिए हिसाब किताब शुरू कर दिया है। आप अपनी सरकार के पांच साल के कामकाज पर दम भर रही है, वहीं भाजपा केंद्र सरकार के कार्यों को गिना रही है। कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में हुए काम-काज के सहारे मतदाताओं के बीच जाने को तैयार है। हालांकि, एनआरसी, सीएए जैसे राष्ट्रीय महत्व के मसले भी दिल्ली चुनाव में हलचल पैदा करेंगे।
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चुनाव की घोषणा होने के साथ आप संयोजक व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने साफ कर दिया है कि उनका चुनावी अभियान सकारात्मक होगा। दूसरी पार्टियों में खोट ढूढ़ने व आरोप-प्रत्यारोप की चुनावी सियासत में फंसने की जगह हम बीते पांच सालों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी सरीखे क्षेत्रों में किए गए कार्यों पर वोट मांगेंगे। वहीं, बीच-बीच में एमसीडी व डीडीए के कार्यों के सहारे भाजपा को कटघरे में खड़ा किया जाएगा। इस सबके बीच आप की कोशिश राष्ट्रीय मसलों से खुद को दूर रखने की है। इस पर जरूरत भर की प्रतिक्रिया देने के अलावा पार्टी ज्यादा बात नहीं करेगी।
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दूसरी तरफ, भाजपा को केंद्र सरकार के कार्यों का सहारा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बीते दिनों की चार सभाओं में इसकी पिच सेट करते भी दिखे। हालांकि, उन्होंने बीच-बीच में सीएए, आतंकवाद, पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मसलों पर भी बात की। फिर भी, भाजपा की चुनावी रणनीति अनधिकृत कॉलोनियों के लोगों को मालिकाना हक देने के इर्द-गिर्द तैयार की जा रही है।
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वहीं, झुग्गी के लोगों को जहां झुग्गी, वहीं मकान देने की योजना पर भाजपा की नजर है। जबकि प्रदूषण दूर करने के लिए पेरीफेरल कॉरीडोर, मेट्रो, आरआरटीएस प्रोजेक्ट को चुनावी मसला बनाएगी। दूसरी तरफ दिल्ली सरकार पर भाजपा हमलावर भी रहेगी। इसमें आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना सरीखी केंद्रीय योजनाओं को दिल्ली में लागू न करने का मसला उठाया जाएगा।
कांग्रेस को इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कामों को गिना कर मैदान में उतरेगी। पार्टी की चुनावी रणनीति के केंद्र में 1998-2013 के बीच दिल्ली में किए गए विकास कार्य रहेंगे। इसमें खास जोर कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान बुनियादी क्षेत्रों के किए गए कार्यों पर होगा। इसके अलावा एनआरसी, सीएए जैसे मसलों पर भी भाजपा को कटघरे में खड़ा करेगी।