दिल्ली विधानसभा चुनावः अंतिम दौर में भाजपा ने नीतीश को मनाया तो अकाली दल को भी साधा
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दिल्ली विधानसभा चुनाव के अंतिम दौर में भाजपा ने मजबूत सियासी बिसात बिछाने में सफलता हासिल कर ली है। चुनाव प्रचार खत्म होने से महज एक सप्ताह पूर्व पार्टी ने सहयोगी जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के साझा रैली के लिए राजी किया तो दूसरी ओर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) से नाराज चल रहे दूसरे सहयोगी शिरोमणि अकाली दल को भी साधने में सफलता हासिल की। संसद में सीएए के समर्थन के बावजूद नीतीश इसके प्रावधानों पर सवाल उठा रहे थे तो अकाली दल ने इसके विरोध में विधानसभा चुनाव से ही किनारा कर लिया था।
दरअसल सीएए और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) पर सहयोगियों की ओर से जताई जा रही आपत्ति ने विपक्ष को दिल्ली विधानसभा चुनाव में बड़ा सियासी हथियार दे दिया था। जदयू और अकाली दल के विपरीत रुख के कारण भाजपा की स्थिरऊत लगातार असहज होती जा रही थी। अब जबकि भाजपा ने जदयू के साथ-साथ अकाली दल को भी साध लिया है, ऐसे में पार्टी यह संदेश देने में सफल रही है कि सीएए-एनपीआर जैसे मुद्दे पर राजग में कोई अंतर्विरोध नहीं है।
अमित शाह ने बिछाई बिसात
पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने के बावजूद दिल्ली चुनाव की जिम्मेदारी संभाल रहे अमित शाह ने इस मामले में व्यूह रचना की। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने नीतीश से व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत कर उन्हें साझा रैलियां संबोधित करने के लिए राजी किया। इसी प्रकार अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखबीर सिंह बादल से संपर्क साध कर अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात सुनिश्चित कराई।
नड्डा से मुलाकात के बाद बादल ने दिल्ली चुनाव में भाजपा को समर्थन देने का बयान दिया। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अकाली दल के समर्थन के बाद आधा दर्जन ऐसी सीटों पर भाजपा को लाभ मिलेगा जहां सिख मतदाताओं की संख्या प्रभावशाली है। इसके अलावा नीतीश के साथ साझा रैलियों से अप्रवासी बिहारियों, पूर्वांचलियों के बीच महत्वपूर्ण सियासी संदेश जाएगा।
राष्ट्रवाद के साथ एकजुटता का संदेश
शाह के इस दांव से भाजपा दिल्ली चुनाव में राष्ट्रवाद के साथ राजग में एकजुटता का संदेश देने में कामयाब रही है। इसके साथ ही पार्टी के सहयोगी दल में अहम जिम्मेदारी संभालने के बावजूद विपक्षी नेताओं के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर से भी निजात मिल गई है। गौरतलब है कि साझा रैली पर सहमति देने के तत्काल बाद नीतीश ने प्रशांत किशोर के साथ सीएए पर सवाल उठाने वाले पवन कुमार को जदयू से बाहर कर दिया है।