धीमी आंच पर क्यों पक रही कांग्रेस की सियासी खिचड़ी?
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में अब केवल एक सप्ताह का ही समय शेष बचा है। भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी ने चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। लेकिन इस चुनाव की एक महत्त्वपूर्ण खिलाड़ी कांग्रेस अभी भी प्रचार की गति नहीं पकड़ पाई है। पार्टी के शीर्ष नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अभी तक प्रचार से दूरी बना रखी है। पार्टी के स्टार प्रचारकों में भी अभी बहुत उत्साह नहीं दिखाई पड़ रहा है।
नवजोत सिंह सिद्धू और शत्रुघ्न सिन्हा अभी तक लोगों के बीच नहीं पहुंचे हैं। यहां तक कि प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालते ही चुनावी सभाओं से दिल्ली को मथ कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाले सुभाष चोपड़ा भी अब शिथिल पड़ते दिख रहे हैं। इससे कांग्रेस के उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल बन रहा है। यह कांग्रेस की चुनावी गलती है, या जानबूझकर एक रणनीति के तहत ऐसा किया जा रहा है, इस बात को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चा हो रही है।
भाजपा को रोकने की रणनीति
चर्चा है कि कांग्रेस आम आदमी पार्टी के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करके उसके साथ खड़ी नहीं दिखना चाहती थी, इसी कारण से उससे गठबंधन नहीं किया गया। लेकिन भाजपा को रोकने के लिए उसने कई सीटों पर आम आदमी पार्टी को खुली छूट दे दी है। वोट काटकर वह अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को फायदा नहीं पहुंचाना चाहती थी। यही कारण है कि वह अपने कमजोर प्रत्याशियों के चुनावी क्षेत्र में पूरा जोर नहीं लगा रही है। जबकि कांग्रेस के जो प्रत्याशी मजबूत हैं और चुनाव में जीत सकते हैं, पार्टी ने वहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इन क्षेत्रों में आने वाले दिनों में शीर्ष नेताओं के रोड शो और रैलियां भी आयोजित की जायेंगी।