महिला की छाती में था एक किलो का दुर्लभ ट्यूमर, डॉक्टरों ने बचाई जान
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छाती में एक किलोग्राम वजन के ट्यूमर से रात दिन बैचेन रहने वाली एक महिला को भारत के डॉक्टरों ने संजीवनी दी है। महिला अफगानिस्तान की निवासी है। 70 वर्षीय महिला फिरोजा सरवारी छाती में दुर्लभ ट्यूमर से पीड़ित थीं, जिसका सफल इलाज दिल्ली के अपोलो अस्पताल में हुआ।
डॉ. सुरेश सिंह नरूका और उनकी टीम ने रेट्रोस्टर्नल हेमी थॉयरोइडेक्टोमी सर्जरी के जरिए महिला की जान बचाई। डॉक्टरों के अनुसार, फिरोजा सरवारी को गर्दन में सूजन की शिकायत थी, उन्हें सांस लेने और कुछ भी निगलने में परेशानी हो रही थी। जांच करने पर पता चला कि उनकी छाती में एक बड़ा ट्यूमर हो गया है, जो गर्दन में थॉयराइड ग्लैण्ड से निकल रहा था।
डॉ. भाभा नंदा दास ने बताया कि ट्यूमर की वजह से महिला की सांस और भोजन की नली दब रही थी और दिल की वैसल्स पर भी असर पड़ रहा था। हालांकि ट्यूमर थॉयराइड ग्लैण्ड से निकल रहा था और यह छाती में फैल था। जिसके चलते कई जटिलताएं हो सकती थीं।
जैसे- आवाज जाना, गर्दन में स्थायी छेद, दिल की बड़ी वैसल्स को नुकसान पहुंचना, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग या टोरेशियल हेमरेज, ऐसे में मरीज का जीवन खतरे में था और सर्जरी के दौरान मरीज की मृत्यु तक हो सकती थी। इसलिए डॉक्टरों को बहुत सावधानी से उनका इलाज करना था, ताकि सर्जरी के दौरान अन्य अंगों या वैसल्स को नुकसान न पहुंचे।
जांच के बाद प्रोफेसर डॉ अमित किशोर (सीनियर कन्सलटेन्ट सर्जन, ईएनटी), डॉ वीनसरावत (रजिस्ट्रार) की टीम ने ओपन चेस्ट सर्जरी के द्वारा ट्यूमर को निकाला, और सुनिश्चित किया गया कि दिल की वैसल्स से बहुत ज्यादा ब्लीडिंग न हो।
डॉ. सुरेश सिंह नरूका ने कहा कि हमने ट्यूमर निकालने के लिए रेट्रो स्टर्नल हेमी थॉयराइडेक्टोमी सर्जरी करने का फैसला लिया। इस तरह की सर्जरी बहुत दुर्लभ और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होती है, इसमें सर्जनों और विशेषज्ञों की टीम को एक साथ मिलकर आपसी तालमेल में काम करना होता है।
सर्जरी के दूसरे दिन मरीज को छुट्टी दे दी गई और अब वह अपने देश लौटने की योजना बना रहीं हैं।