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Delhi: शीर्ष नेतृत्व के फैसले से नाराज होकर छोड़ी कांग्रेस, लोकसभा चुनाव से जुड़े फैसलों पर भी नहीं थी रजामंदी

Sun, 05 May 2024 06:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा नवनीत शरण, नई दिल्ली
नवनीत शरण, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 05 May 2024 06:15 AM IST
सार

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरविंद सिंह लवली सहित चार बड़े नेताओं के भाजपा में शामिल होने के पीछे का कारण राष्ट्रीय नेतृत्व से नाराजगी है।

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Delhi: Angered by the decision of top leadership, leaders left Congress
अरविंदर सिंह लवली - फोटो : amarujala

विस्तार

लोकसभा चुनाव की बिसात दिलचस्प हो गई है। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरविंद सिंह लवली सहित चार बड़े नेताओं के भाजपा में शामिल होने के पीछे का कारण राष्ट्रीय नेतृत्व से नाराजगी है। आम आदमी पार्टी से गठबंधन और कन्हैया कुमार के रूप में बाहरी नेता व डॉ. उदित राज को आरक्षित सीट से चुनाव में उतारना इन पुराने नेताओं को पसंद नहीं आया।

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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लवली और राजकुमार चौहान जैसे पुराने कांग्रेसी नेताओं का दूसरी बार भाजपा में शामिल होना पार्टी के अंदर बिखराव का बड़ा संदेश है। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बाद दूसरी लाइन के यही नेता थे। उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से कांग्रेस आलाकमान ने जब से कन्हैया कुमार को उतारा था, तभी से विरोध शुरू हो गया था। इसी तरह उत्तर-पश्चिमी दिल्ली सीट से डॉ. उदित राज भी प्रदेश नेतृत्व को पसंद नहीं थे। पार्टी कार्यालय में विरोध-प्रदर्शन तक हुआ। पार्टी में ही नया गुट उभरा। अपनी राय भी जाहिर की गई कि बिना किसी सलाह के केंद्रीय नेतृत्व ने फरमान जारी करते हुए उम्मीदवार थोप दिए। 
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दरअसल, उत्तर-पूर्वी सीट पर लवली की नजर थी और उत्तर पश्चिम सीट पर राजकुमार चौहान की। उन्हें आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की राजनीति से यह भी डर सता रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनका राजनीतिक अस्तित्व ही न खत्म हो जाए। दूसरी तरफ कन्हैया कुमार ही दिल्ली की राजनीति पर हावी न हो जाएं। पार्टी में शामिल होने के दौरान लवली ने भी स्पष्ट किया कि उनके जैसे कई कांग्रेसी नेता अपने शीर्ष नेतृत्व से गठबंधन को लेकर नाराज हैं। संभावना यह भी जताई जा रही है कि कई और नेता भाजपा में शामिल होने की तैयारी में हैं।
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क्षेत्र में कांग्रेस नेता ठीक से नहीं हो पाए सक्रिय
कन्हैया कुमार अभी तक क्षेत्र में ठीक से सक्रिय नहीं हो पाए हैं। पुराने कांग्रेसी नेताओं का विरोध भी उन्हें झेलना पड़ रहा है। दूसरी तरफ चांदनी चौक के प्रत्याशी जेपी अग्रवाल जब नामांकन दाखिल करने पहुंचे तो उनके क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के साथ अन्य पुराने कांग्रेसी नेताओं की भी कमी स्पष्ट रूप से देखने को मिली। इसी तरह पुराने कांग्रेसी नेता महाबल मिश्रा के चुनाव से भी नेता दूरी बनाए हुए हैं। गठबंधन के तहत चुनावी मैदान में उतरने वाले कांग्रेस प्रत्याशियों को आप के कार्यकर्ताओं का भी पूरा समर्थन नहीं मिल पा रहा है। उनकी चुनावी रणनीति ठीक से न तो तैयार हो पा रही है और न ही बूथ लेवल पर कार्यकर्ता सक्रिय हो पा रहे हैं।

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