नए साल में दिल्ली और केंद्र नई जंग के लिए तैयार, यहां फंसेगा पेंच
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इस साल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में दिल्ली ने ‘आप’ को प्रचंड बहुमत वाली सरकार दी। लेकिन केन्द्र सरकार से निरंतर टकराव के साथ सम-विषम फॉर्मूला, बिना बिल के पानी, वॉट्स ऐप और मोबाइल ऐप पर स्वच्छ दिल्ली, बेघर को रैन बसेरे, ई सर्टिफिकेट समाधान का प्रयोग भी केजरीवाल सरकार कर रही है। नए साल में कानूनों को लेकर केंद्र सरकार से सुलह की उम्मीद है।
नए साल की बड़ी चुनौती ऑड ईवन फार्मूला सफलता, विस में पास कानून को वास्तव में कानूनी बनाने और केन्द्र से टकराव छोड़कर सुलह का रास्ता निकालने की है।
अनाधिकृत कालोनियों के नियमन, लोकपाल का नौकरशाह और राजनेताओं पर लगाम, फ्री वाईफाई, 20 हजार नए शिक्षकों की भर्ती, पब्लिक ट्रांसपोर्ट दुरुस्त, यमुना की सफाई, बिजली का ऑडिट सामने रखने और भ्रष्टाचार पर लगाम के सवालों का जबाव सबकुछ करके देने का चैलेंज केजरीवाल सरकार के सामने 2016 लेकर आ रहा है।
ये मामले बने चुनौती होगा टकराव
प्रदूषण कम करने की कोशिश में सफलता के लिए सम-विषम फार्मूले के ट्रैक पर सुविधाओं को स्पीड देना। सार्वजनिक परिवहन सुविधा की कमी के कारण कई तरह की छूट दिए जाने के बावजूद फार्मूले की सफलता पर आशंकाएं व अटकलें बहुत हैं।
दिल्ली जनलोकपाल अधिनियम, स्कूलों के खाता जांच अधिनियम को कानूनी रूप मिले। दिल्ली ने जनलोकपाल कानून में जो प्रावधान किए हैं, उसकी मंजूरी पहले केंद्र से नहीं ली गई और कुछ प्रावधान केन्द्रीय कानून से टकराव वाले हैं। दोनों बिल केंद्र को भेजे हुए हैं।
दिल्ली में फ्री वाई-फाई और स्कूलों की शिक्षकों की उपलब्धता की अपेक्षाएं हैं। सरकार ने प्रयोग दोनो मामलों में शुरू किए हैं जिसे आगे बढ़ाकर जनता केमन में विश्वास बनाना आप सरकार के लिए चुनौती है।
पढ़ लीजिए 2016 में सरकार से क्या हैं उम्मीदें
अनधिकृत कॉलोनियों के नियमन और उन कॉलोनियों में रजिस्ट्री की शुरुआत का वादा दिल्ली सरकार कई बार कर चुकी। इस साल ऐसे वालों को सौगात की उम्मीद है।
इससे पूर्व कांग्रेस सरकार और फिर राष्ट्रपति शासन केदौरान भाजपा सरकार ने भी कालोनियों केनियमन का आदेश तक करने की घोषणाएं की थीं। केंद्र और उपराज्यपाल से टकराव खत्म करके समन्वय नहीं होने की दशा में विकास के कार्य पिछड़ रहे हैं।
ऐसे में लोगों को उम्मीद लगाए हैं कि केंद्र और दिल्ली की लड़ाई खत्म हो। ताकि अधिकारों के नाम पर वो ठगे ना जाएं। चाहे जांच आयोग का मसला हो या फिर मूलभूत काम, दोनो मिलकर समाधान निकालें।
बिजली के मासिक 400 यूनिट तक खर्च करने पर दी गई सब्सिडी ने लोगों को राहत दी है। फिर इस साल दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली वितरण कंपनियों को दरें भी नहीं बढ़ानें दी और उपभोक्ताओं के जो विवाद बिजली कंपनियों के थे, उसे छूट के साथ निपटाया।
2015 का ये रहा लेखा-जोखा
दो सौ तरह के शपथपत्र को सरकारी कामकाज से हटाने के अलावा सिटीजन चार्टर के नए कानून को विस में पास किया। प्रमाणपत्रों का ऑनलाइन सत्यापन शुरू हुआ तो सरकार के करीब दो दर्जन विभाग को ई-ऑफिस से जोड़ा।
15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाकर पर्यावरण सुधार की दिशा में कदम उठाया। फिर ऑड ईवन फार्मूला 1 जनवरी से लागू करने का फैसला भी किया।
मोहल्ला क्लीनिक, पॉलिक्लीनिक की शुरुआत करके घर के नजदीक लोगों को इलाज की सुविधा प्रारंभ हुई। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पूर्वी दिल्ली के कांति नगर में पॉलीक्लीनिक तो शकूरबस्ती में मोहल्ला क्लीनिक शुरू की गई।
यमुना आरती की शुरुआत करके यमुना से जनता को जोड़ने की शुरुआत की गई तो पर्यटन को बढ़ावा देने वाले इवेंट में लाइसेंस का सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम की शुरुआत की गई।