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दिल्ली में सरोगेट मदर से 41 कोरोना संक्रमित, सभी लोग एक ही इमारत के

Sun, 03 May 2020 03:54 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sun, 03 May 2020 03:54 AM IST
सार

  • एक ही बिल्डिंग के 41 लोग पाए गए कोरोना संक्रमित
  • 18 अप्रैल को एक संक्रमित पाए जाने के बाद से भवन सील 
  • यहां एक केस के बाद ही घोषित किया गया कंटेनमेंट जोन
  • रिपोर्ट में देरी से कोरोना से जंग में पिछड़ रही दिल्ली

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delhi 41 people from a building in Theke Wali Gali near the DC office in Kapashera, have tested positive for COVID19 building was already sealed know every detail about it
कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान दिल्ली की एक तस्वीर (फाइल फोटो) - फोटो : जी पाल

विस्तार

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के कापसहेड़ा के कंटेनमेंट जोन से शनिवार को जिस तरह की खबर आई वह राज्य सरकार के साथ ही स्थानीय निवासियों की भी चिंता बढ़ाने वाली है। दरअसल, कापसहेड़ा में किराये की कोख यानी सरोगेट मदर से शुरू होकर कोरोना संक्रमण का मामला 41 लोगों तक पहुंच गया। 19 अप्रैल से ठेके वाली गली में जो मकान सील है, उसके 41 निवासियों में कोरोना की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट मिलने में देरी के कारण महिला के अलावा अन्य मरीजों का खुलासा जब हुआ, तो पूरे इलाके में लोग दहशत में आ गए। 

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दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के डीएम ने जानकारी दी है कि कापसहेड़ा इलाके में डीसी दफ्तर के सामने वाली ठेके वाली गली की एक बिल्डिंग से 41 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। बता दें कि 18 अप्रैल को इस मकान में एक संक्रमित शख्स मिला था जिसके बाद इस मकान को सील कर इलाके को कंटेनमेंट जोन में डाल दिया गया था।
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क्यों सिर्फ एक शख्स पॉजिटिव मिलने के बाद घोषित किया कंटेनमेंट जोन?
दिल्ली सरकार का नियम है कि जहां तीन या उससे अधिक पॉजिटिव मरीज मिलेंगे उस इलाके या बिल्डिंग को सील कर उसके आसपास के इलाके को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया जाएगा। हालांकि, यह नियम यहां इसलिए लागू नहीं हुआ, क्योंकि इस एक मकान में भारी संख्या में लोग रहते हैं। इसके चलते सरकार ने पॉजिटिव मरीज मिलने के अगले ही दिन यानी 19 अप्रैल को इस बिल्डिंग को सील कर इलाके को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया था।




20 और 21 अप्रैल को भेजे गए थे सैंपल
इसके साथ ही सील की गई बिल्डिंग में रहने वाले लोगों के अलावा दूध वाले, सब्जी वाले, आस पड़ोस के 95 लोगों के सैंपल 20 अप्रैल को लिए गए थे और 80 लोगों के सैंपल 21 अप्रैल को लिए गए थे। इन सभी सैंपल को टेस्ट के लिए नोएडा की एनआईबी लैब में भेजा गया था। इनमें से 67 लोगों की टेस्ट की रिपोर्ट आ गई है, जिसमें से 41 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए है। ये सभी एक ही बिल्डिंग में रहते हैं। बाकी लोगों की रिपोर्ट का जिला प्रशासन को इंतजार है।

संक्रमित 30 लोग एक ही समुदाय के
संक्रमित 30 लोग एक ही समुदाय के हैं, जिनमें अधिकतर फैक्ट्रियों में काम करने वाले कामगार हैं। दक्षिण पश्चिमी दिल्ली के जिलाधिकारी ने बताया की महिला के संक्रमित होने के बाद से ही इस गली में सभी तरह की एहतियात बरती जा रही थी, सुरक्षा के लिहाज से पुलिस की मुस्तैदी भी कर दी गई थी। पिछले 14 दिन से होम क्वारंटीन किए गए लोगों को प्रशासन की तरफ से ही खाना भी मुहैया किया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने में हुई देरी पर उन्होंने कहा कि इस वजह से मामलों का पता बाद में चला, लेकिन अंदेशा होने पर इलाके में हॉटस्पॉट की तरह एहतियात बरती जा रही थी, ताकि संक्रमण आगे न बढ़े।

देर से रिपोर्ट आने के चलते कोरोना से जंग में पिछड़ रही दिल्ली

तमाम प्रयासों के बाद भी दिल्ली कोरोना से लड़ाई में पीछे क्यों है और आखिर क्यों यहां केस कम होने का नाम नहीं ले रहे? इन सवालों का जवाब है देर से रिपोर्ट आना। यह उदाहरण कापसहेड़ा के इसी केस में दिखाई देता है जहां 20 और 21 अप्रैल को एनआईबी लैब, नोएडा में सैंपल भेज दिए गए थे लेकिन अब तक करीब 200 सैंपलों में से सिर्फ 67 की रिपोर्ट आई है, वो भी करीब 10 दिन बाद। ऐसे में जब तक अन्य सैंपल की रिपोर्ट आएगी तब तक प्रशासन को कार्रवाई करने में देर हो सकती है और स्थिति गंभीर हो सकती है।

तीन दिन में लैब पहुंच रहे सैंपल, 15 दिन में रिपोर्ट
कोरोना वायरस को लेकर मंगलवार को 90 फीसदी दिल्ली ऑरेंज जोन में तब्दील हो सकती थी, लेकिन जांच रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने के कारण ऐसा नहीं हो सका। मरीजों के सैंपल तीन-तीन दिन बाद लैब में जा रहे हैं और इनकी रिपोर्ट करी 15 दिन में आ रही है। 

ऐसे में मरीज पॉजिटिव होगा भी तो वह ठीक हो गया होगा या फिर उससे कितने लोग संक्रमित हुए प्रशासन को इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। यही नहीं नॉन कोविड अस्पताल, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा गार्डों के संक्रमित मिलने के चलते सरकार व प्रशासन भी चिंतित है।
 

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