हुड्डा के बेटे ने शारदा को दिया 'सहारा'
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फरीदाबाद के पार्षदों एवं पार्टी नेताओं के विरोध के बावजूद मुख्यमंत्री पुत्र एवं रोहतक के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा बुधवार को मुख्य संसदीय सचिव शारदा राठौर के कार्यालय पहुंचे। इस दौरे से दोनों के गिले-शिकवे दूर हुए और यह संदेश गया कि अब शारदा राठौर कांग्रेस में ही रहेंगी।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिलने के बाद यह चर्चा थी कि राठौर कांग्रेस छोड़ सकती हैं। सांसद ने यहां दावा किया कि प्रदेश में तीसरी बार कांग्रेस की सरकार बनेगी। जिताऊ दावेदारों को टिकट दी जाएगी। बल्लबगढ से शारदा राठौर मजबूत उम्मीदवार हैं। कांग्रेस बड़ी पार्टी है इसमें गिले-शिकवे होते रहते हैं।
हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस व्यापारी, किसान, मजदूर व कर्मचारियों की पार्टी है। भाजपा व इनेलो जनता को बरगलाने का काम कर रही हैं। भाजपा ने अभी तक मुख्यमन्त्री तक की घोषणा नही की है वहीं इनेलो के सुप्रीमो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। इस मौके पर शारदा राठौर ने कहा कि वह कांग्रेसी थीं, कांग्रेसी हैं और कांग्रेसी रहेंगी। विपक्ष से उनके पास लगातार ऑफर मिलते रहे हैं।
केंद्रीय गृह मन्त्री राजनाथ सिंह व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बुलाकर भाजपा से चुनाव लड़ने के लिए कहा था। लेकिन वह ऑफर उन्होंने ठुकरा दिया।
'मुलाकात का मतलब टिकट मांगना नहीं'
मीडिया के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजपूत नेता होने के कारण केंद्रीय गृहमंत्री ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया था। वह उनके पुराने जानकार हैं। वहीं पर शिष्टाचार में उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की थी। वह खुद भाजपा नेताओं से नहीं मिलने पहुंची थीं। इस मुलाकात का मतलब टिकट मांगने से नहीं लगाया जाना चाहिए।
शारदा ने कहा कि पार्टी से नाराजगी सिर्फ कार्यकर्ताओं की मांगों को लेकर थी। उसे मुख्यमंत्री ने दूर कर दिया है। चुनाव वह बल्लभगढ़ से ही लड़ेंगी। मेट्रो बल्लभगढ़ तक लाना उनकी बड़ी उपलब्धि है। जब यह पूछा गया कि वह 15 अगस्त को बहादुरगढ़ में झंडा फहराने क्यों नहीं पहुंचीं तो शारदा ने कहा कि उस समय उन्हें वायरल था। वह यहां मेट्रो अस्पताल में भर्ती थीं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के दो कार्यक्रमों में न आने के बावत उन्होंने कहा कि एक बार वह शिरडी और दूसरे कार्यक्रम के दिन औरंगाबाद में थीं।
टिकट के दूसरे दावेदार रहे गायब:
शारदा राठौर के खिलाफ सीएम से शिकायत करने वाले और टिकट के दूसरे दावेदार इस कार्यक्रम से दूर रहे। मुख्यमंत्री पुत्र के पहुंचने के बाद भी न तो वहां पार्षद कमल यादव आए न ही राव रामकुमार, राजेंद्र अग्रवाल, सतवीर डागर एवं डिप्टी मेयर राजेंद्र भामला ने दूरी बनाए रखना ही उचित समझा। हालांकि राठौर का कहना है कि जो लोग उनका विरोध कर रहे हैं वह भी अब साथ आ जाएंगे, क्योंकि लोकतांत्रिक पार्टी में यह सब चलता रहता है।