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1984 सिख विरोधी दंगे में सज्जन कुमार दोषी करार, उम्रकैद की सजा

Mon, 17 Dec 2018 12:27 AM IST
Priyesh Mishra ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Mon, 17 Dec 2018 12:27 AM IST
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1984 anti Sikh riots Sajjan Kumar has been sentenced to life imprisonment
सज्जन कुमार (फाइल) - फोटो : ani

1984 सिख दंगों में दिल्ली छावनी के राजनगर पालम इलाके में एक नवंबर 1984 को पांच सिखों की हत्या से जुड़े मामले में अदालती फैसले के खिलाफ सात अपीलों पर हाईकोर्ट आज अपना फैसला सुना दिया है। हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी करार दिया है। इनके ऊपर आपराधिक साजिश रचने का आरोप साबित हुआ है। सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा मिली है। इन्हें 31 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा।

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इस मामले में दोषियों ने अपनी सजा और सीबीआई ने इस मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। दंगा पीड़ित जगदीश कौर ने भी सज्जन कुमार की रिहाई को चुनौती दे रखी है। 
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न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर व न्यायमूर्ति विनोद गोयल ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 29 अक्तूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। निचली अदालत ने 30 अप्रैल 2013 को सज्जन कुमार को बरी कर दिया था तथा पूर्व पार्षद बलवान खोखर, कैप्टन भागमल व गिरधारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं, पूर्व विधायक महेंद्र यादव व किशन खोखर को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। दोषियों ने मई 2013 में अदालती फैसले को चुनौती दी थी। 
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पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सिख दंगा मामलों की सुनवाई करते हुए 29 मार्च 2017 को पहले बंद हो चुके पांच मामलों में बलवान खोखर व महेंद्र यादव समेत 11 लोगों को नोटिस जारी किया था। अदालत ने इनसे पूछा था कि क्यों न इन मामलों में दोबारा जांच व सुनवाई करवाई जाए, क्योंकि उन पर बेहद गंभीर आरोप हैं।

 
सीबीआई की ओर से अपील पर जिरह करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा ने कहा था कि जस्टिस आरएन मिश्रा जांच आयोग के समक्ष सज्जन कुमार के खिलाफ 17 हलफनामे दिए गए थे लेकिन उन पर एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था। एनडीए सरकार ने इन मामलों की जांच के लिए जस्टिस नानावटी जांच आयोग बनाया था। इस आयोग ने दिल्ली छावनी व पुल बंगश इलाकों में हुई हत्याओं की जांच दोबारा कराने की सिफारिश की थी। इसके बाद इन मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने जांच के बाद इन मामलों में वर्ष 2010 में कड़कड़डूमा जिला अदालत में दो आरोप पत्र दाखिल किए थे।

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