एक के बाद एक पांच तेंदुओं की मौत, सुलग रहे सवाल
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एक के बाद एक तेंदुओं की मौत ने पर्यावरणविदों और वन्य जीव प्रेमियों को विचलित कर दिया है। अप्रैल माह में चार तेंदुओं के मौत मामले की रिपोर्ट अभी कोर्ट में पेश भी नहीं की गई है कि शनिवार को मानेसर के सहरावण गांव के पास सड़क दुर्घटना में एक और तेंदुए की मौत हो गई।
इसकी उम्र तकरीबन 12 वर्ष बताई जा रही है। इस तेंदुए को सड़क पार करते समय किसी अज्ञात वाहन ने इसके पिछले हिस्से पर टक्कर मारी थी।
झाड़ियों में पहुंचने के बाद इसने वहां दम तोड़ दिया था। तेंदुओं के संरक्षण की दिशा में काम करने वाले गुड़गांव के पूर्व कंजरवेटर आरपी बलवान ने साफ तौर पर कहा कि वन्य जीव विभाग इस दिशा में गंभीर नहीं है।
तेंदुओं के रहने वाले क्षेत्र में दिनों दिन अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। जितने भी तेंदुओं की मौत हुई है वह सोहना से मानेसर तक के इलाके में हुई है।
फार्म हाउस के कारण तेंदुए बेघर
मानेसर के ऊपरी क्षेत्र में जहां तेंदुओं के रहने का ठिकाना था उसे आर्मी और अंसल ने छीन लिया। नौरंगपुर बांस गांव के आसपास के क्षेत्र में फार्म हाउस के कारण भी तेंदुए बेघर हो गए।
वन्यजीव विशेषज्ञ आरपी बलवान बताते हैं कि फार्म हाउस वाले पिंजड़ा लगा तेंदुओं का शिकार करते हैं। नूंह और मोहम्मदपुर क्षेत्र में भी तेंदुए काफी थे मगर वन्य जीव विभाग की लापरवाही के कारण वह भी विलुप्त होने के कगार पर हैं।
इसका ठिकाना जिस प्रकार से छिन रहा है वह खाने और पानी की खोज में सड़क पार करने को मजबूर हो रहे हैं। इस कारण वह वाहनों की चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं।