फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   De-composure slurry manufacturing center started Chief Minister Kejriwal inspected

पराली से खाद बनाने वाला डी-कंपोजर घोल निर्माण केंद्र शुरू, मुख्यमंत्री केजरीवाल ने किया निरीक्षण 

Wed, 07 Oct 2020 12:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 07 Oct 2020 12:09 AM IST
विज्ञापन
De-composure slurry manufacturing center started Chief Minister Kejriwal inspected
1 - फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को साउथ-वेस्ट दिल्ली स्थित खरखरी नाहर गांव में पराली को गलाने के लिए बनाए गए डी-कंपोजर घोल निर्माण केंद्र का निरीक्षण किया और घोल बनाने की प्रक्रिया को समझा। दिल्ली सरकार ने पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूटी की निगरानी में पराली के डंठल को खेत में गला कर उससे कंपोस्ट खाद बनाने के लिए इस घोल का निर्माण कार्य शुरू कराया है। सोमवार को यहां पर 200 एकड़ जमीन पर छिड़काव के लिए घोल तैयार किया गया।

विज्ञापन


मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार इस घोल का छिड़काव करीब 700 हेक्टेयर जमीन पर अपने खर्चे पर करेगी। इससे किसानों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। हालांकि किसानों को अपने खेत में इस घोल के छिड़काव के लिए अपनी सहमति देनी होगी। अगले सात दिन के बाद यह घोल बन कर तैयार हो जाएगा और 11 अक्टूबर से दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में घोल का छिड़काव किया जाएगा। यह प्रयोग सफल होता है, तो अन्य राज्यों के किसानों को भी पराली का एक समाधान मिल जाएगा।
विज्ञापन


मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हर साल पुरानी फसल काटने के बाद किसान को नई फसल की बोबाई करनी होती है। ऐसे में किसान के खेत में पराली बच जाती है। जो किसान गैर बासमती चावल उगाते हैं, उनके खेत में यह पराली के मोटे-मोटे डंठल बच जाते हैं। अभी तक किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह थी कि अगली फसल की बोबाई के लिए उनके पास समय कम होता है और उस पराली से वो निजात कैसे पाएं? उसके लिए पराली एक समस्या बन रही थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे में किसान उस पराली को जलाने पर मजबूर होता है। जबकि पराली जलाने की वजह से न केवल उस जमीन के अंदर फसल के लिए फायदेमंद बैक्ट्रिया भी मर जाया करते हैं। बल्कि पराली के जलाने से निकलने वाले धुंए से उस किसान और पूरे गांव के लोगों को प्रदूषण से परेशानी होती थी। साथ ही वह धुंआ दिल्ली समेत उतर भारत में फैल जाता है। जिसके चलते सभी लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। सभी लोग प्रदूषण से पीड़ित होते हैं। 

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुझे बेहद खुशी है कि पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पराली को निस्तारित करने का समाधान निकाला है। पूसा द्वारा इजात किया गया समाधान बहुत ही सस्ता और सरल है। पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट ने कुछ कैप्सूल बनाए हैं। इस कैप्सूल के जरिए घोल बनाया जाता है। इस घोल को अगर खेतों में खड़े पराली के डंठल पर छिड़क दिया जाए, तो वह डंठल गल जाता है और वह गल करके खाद में बदल जाता है। डंठल से बनी खाद से उस जमीन की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है, जिसके बाद किसान को अपने खेत में खाद कम देना पड़ता है।

इस तकनीक के प्रयोग के बाद किसान को फसल उगाने में लागत कम लगेगी, किसान की फसल की पैदावार अधिक होगी और किसान को खेतों में खड़ी फसल जलानी नहीं पड़ेगी। इसकी वजह से खेत में उपयोगी वैक्टीरियां भी नहीं मरेंगे और लोगों को प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी। 

कम खर्च में विकसित की है तकनीक
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि इस तकनीक को विकसित करने में माल ढुलाई के खर्चे को जोड़ने के बाद भी केवल 20 लाख रुपए का खर्च आ रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो हम किसानों के खेत में घोल का छिड़काव हर साल करेंगे। 

इस मौके पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि हम दिल्ली को रोल मॉडल बनाना चाहते हैं, ताकि किसी भी सरकार को पराली को लेकर कोई बहाना बनाने का मौका न मिले और इसे जलाने की जगह कम खर्च में गलाने के बायो सिस्टम का उपयोग पूरे देश में हो सके। इसलिए बड़े पैमाने पर घोल बनाने का काम शुरू हो गया है।  


खेतों में छिड़काव के लिए आगे आ रहे हैं किसान
दिल्ली के लगभग 1200 किसानों ने इस तकनीक को अपने खेत में इस्तेमाल करने की इच्छा जताते हुए रजिस्ट्रेशन कराया है। हम जल्द ही उनके खेतों में इस घोल का छिड़काव शुरू करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed