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हादसे में बेटी खोयी तो औरों की जिंदगी बचाने में लगी

Wed, 05 Nov 2014 01:17 PM IST
अमर उजाला, वैशाली
अमर उजाला, वैशाली Updated Wed, 05 Nov 2014 01:17 PM IST
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Daughter lost in the accident then took charge of saving the lives of others.

गाजियाबाद से नोएडा-दिल्ली जाते समय सफेद ड्रेस पहने इस महिला को आपने ट्रैफिक कंट्रोल करते बहुतों बार देखा होगा।

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जिंदगी की आपाधापी में इनके बारे में सोचने का शायद समय आपको न मिला हो। या जरूरत न समझी हो। तो आइए हम आपको इनके बारे में बताते हैं।

हाथ में डंडा लेकर किसी भी कुशल ट्रैफिक पुलिसकर्मी की तरह यातायात को संचालित करतीं ये हैं डोरिस फ्रांसिस। 57 बरस की फ्रांसिस रोज सुबह 7 से 11 बजे तक एनएच 24 स्थित खोड़ा पुश्ता पर ट्रैफिक कंट्रोल करती हैं।

औरों की जिंदगी की फिक्र करने वाली डोरिस की जिंदगी में हुए एक हादसे ने उनके जीवन को एक नया मोड़ दे दिया। असल में 17 साल की युवा बेटी को हादसे में खोने के बाद डोरिस ने यह फैसला किया कि वे किसी और को ऐसे दर्द से नहीं गुजरने देंगी।
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छह साल से रोजाना सुबह ट्रैफिक कंट्रोल करने का उनका यह सिलसिला जारी है। खोड़ा कालोनी डोरिस बताती हैं कि वह नौ नवंबर 2008 की सुबह थी। उनकी छह संतानों में से सबसे छोटी बेटी निक्की बीमार थी।
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दिल्ली से डॉक्टर को दिखाने के बाद ऑटो से वापस लौट रही थीं। उनके साथ पति विक्टर भी थे। एनएच-24 पर जैसे ही आटो इतवार पुश्ता की ओर मुड़ा, गाजियाबाद की ओर से जाते तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी।

इससे तीनों घायल हो गए और तीनों को ही अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया। इलाज के बाद पति और डोरिस तो स्वस्थ हो गए लेकिन एक वर्ष तक मौत से लड़ने के बाद आखिर निक्की ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

इस हादसे से डोरिस टूट गईं। बाद में उन्होंने फैसला किया कि अब वे किसी दूसरे की जिंदगी में इतवार पुश्ता पर ऐसा हादसा नहीं होने देंगी। यही सोचकर ट्रैफिक कंट्रोल करने निकल पड़ीं।

डोरिस सुबह 7 से 11 बजे तक संभालती हैं ट्रैफिक
डोरिस सुबह सात से 11 बजे तक यातायात नियंत्रित करती हैं। यह पीक आवर्स हैं और हर वाहन चालक जल्दी में रहता है। लोग जल्दी पहुंचने के चक्कर में तेज वाहन चलाते हैं, जिससे हादसे होते हैं।


6 वर्ष में इतवार पुश्ते पर नहीं  हुआ कोई हादसा
यह डोरिस की ही हिम्मत है कि उनके इस तरह की जिम्मेदारी संभालने के बाद करीब छह वर्ष के दौरान इतवार पुश्ता पर अब तक कोई हादसा नहीं हुआ है। वाहन चालक भी उनका सहयोग करते हैं।

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