फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Daughter left school to help serv her sick mother in gurugram

बीमार मां की सेवा के लिए बेटी ने छोड़ा स्कूल, मदद मिली तो पूरे हुए अमीरा के अरमान

Mon, 25 Nov 2019 05:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, गुरुग्राम
अमर उजाला ब्यूरो, गुरुग्राम Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 25 Nov 2019 05:45 AM IST
विज्ञापन
Daughter left school to help serv her sick mother in gurugram
अपनी मां के साथ अमीरा - फोटो : अमर उजाला

मां को कष्ट में देखकर औलाद का परेशान होना स्वाभाविक है। मां की सेवा के मामले में बेटियां एक कदम आगे ही होती हैं। शहर के एक निजी स्कूल में छठीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा अमीरा ने इस बात को साबित कर दिया है। 

विज्ञापन


अमीरा ने मां की सेवा के लिए स्कूल जाना बंद कर दिया। लगातार 20 दिनों तक अनुपस्थित रहने पर स्कूल की तरफ से की गई जांच के बाद सच्चाई सामने आई। 

इसके बाद स्कूल प्रशासन ने खुद आगे बढ़कर एक समाजसेवी संस्था की मदद से अफगानिस्तान मूल की महिला का निशुल्क इलाज कराया गया। मां के पूरी तरह स्वस्थ होने पर छात्रा ने फिर से स्कूल जाना शुरू कर दिया।
विज्ञापन


अफगानिस्तान की मूल निवासी अमीरा की मां मेहरनिशां (42) काला मोतिया (ग्लूकोमा) की बीमारी से पीड़ित थीं। इलाज में लापरवाही के कारण धीरे-धीरे उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अमीरा के पिता अब्दुल शहर के ही एक रेस्तरां में काम करते हैं। लिहाजा उनके ड्यूटी पर जाने के बाद घर में मां की देखभाल करने वाला कोई नहीं था। ऐसे में शहर के एक निजी स्कूल में छठीं कक्षा की अमीरा ने स्कूल जाना बंद कर दिया।
 
नहीं आने पर स्कूल प्रबंधन ने की मुलाकात

अनुपस्थित रहने के बाद स्कूल प्रबंधन ने छात्रा के घर बात की, जिसके बाद पता चला उसकी मां की दोनों आंखों की रोशनी चली गई है और उनकी सेवा के लिए वह स्कूल नहीं आ पाएगी। 

इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने एक स्वयंसेवी संस्था के माध्यम से पीड़ित महिला को रेलवे रोड स्थित निरामया नेत्र संस्थान पहुंचाया। यहां पर जांच के बाद पता चला कि महिला को काला मोतिया है, जिसकी बाद में सर्जरी की गई। अब महिला को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है और वह पूरी तरह से स्वस्थ है और दोनों आंखों से पहले जैसा ही दिखाई देने लगा है।


15 साल पहले भारत आया था परिवार 
अमीरा का परिवार 15 साल पहले अफगानिस्तान के काबुल प्रांत में एक बम धमाके में बुरी तरह घायल हो गया था। डर व खौफ से परेशान परिवार बाद में भारत आ गया और अमीरा के पिता अब्दुल मजीद शहर के एक रेस्टोरेंट में बतौर बावर्ची काम करने लगे। अब्दुल अफगानिस्तान में भी बतौर बावर्ची एक रेस्तरां में काम करते थे और इसी दौरान बम ब्लास्ट हुआ था। तब से ही यह परिवार शहर में बतौर शरणार्थी रह रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed