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लॉकडाउन: नहीं मिली बस तो ठेलों पर सवार होकर ही चल दिए दिल्ली से आरा-पटना

Sat, 28 Mar 2020 10:35 AM IST
प्राची प्रियम सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा
सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा Published by: प्राची प्रियम Updated Sat, 28 Mar 2020 10:35 AM IST
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Daily labours left for hometowns with their own convenience as they dont get bus 
ठेले से घर के लिए परिवार समेत निकले मजदूर - फोटो : अमर उजाला

यह कोरोना वायरस के संक्रमण से भागने वाली भीड़ नहीं है बल्कि मजबूरों की भीड़ है। हमारे पास खाने के पैसे नहीं हैं। अपने गांव जाएंगे तो कम से कम गुजारा तो चला लेंगे। लॉकडाउन के बाद पास में रखे पैसे खत्म हो गए। काम बंद है। कमाई खत्म हो गई है। ऐसे में घर का किराया कैसे देंगे? पेट कैसे पालेंगे? कुछ यही कहना है कि उन मजदूरों का, जो किसी तरह दिल्ली से करीब 1000 किलोमीटर दूर आरा-पटना और इससे भी आगे जाने के लिए ठेले पर निकल पड़े हैं। 12 ठेलों पर बारी बारी से सवार होकर 40 लोग अपने गांव-घर की ओर निकल पड़े हैं। 

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शुक्रवार को एनएच-24 का नजारा देखने लायक रहा। सड़क के किनारे सैकड़ों मजदूरों की भीड़ टोलियों में नजर आईं। शुक्रवार की भीड़ में ऐसे लोग भी शामिल रहे, जो कि बसों की व्यवस्था होने की खबर मिलने के बाद घरों से बोरिया-बिस्तर बांध कर निकल पड़े। इस भीड़ में महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल रहे। यह सभी यूपी के अलग-अलग शहरों में जाने के लिए घरों से निकल पड़े हैं। बस नहीं मिलने पर सब पैदल ही घर की ओर बढ़ रहे हैं।
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इक्का दुक्का बसें, किराया एक हजार 
छिजारसी कट पर बस के इंतजार में खड़े लोगों ने बताया कि दो बसें यूपी के दूसरे शहरों के लिए निकली। इसमें एक निजी बस भी थी। एक निजी बस हरदोई के लिए निकल रही है। उसके चालक-परिचालक एक व्यक्ति का किराया एक हजार रुपये मांग रहे थे।  उन्होंने बताया कि बसों के चालक कहीं भी जाने के लिए एक हजार रुपये से कम पर नहीं मान रहे थे। 

सरकारी घोषणाओं पर नहीं है भरोसा
जब उनसे सरकारी घोषणाओं और मदद की बात कही गई तो उन्होंने बताया कि अभी तक उनके पास कोई भी ऐसा नहीं आया है जो कि राशन और जरूरत का सामान पहुंचाने का वादा करे। ऐसे में सरकारी घोषणाओं पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। अभी निकलने का समय बचा हुआ है लिहाजा गांव की ओर निकल रहे हैं। 

Daily labours left for hometowns with their own convenience as they dont get bus 
परिवार समेत ठेले से घर जाते मजदूर - फोटो : अमर उजाला

पूरी रात दिल्ली और आसपास से निकले लोग
दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से पूरी रात लोग अपने घर और गांव की ओर पैदल ही हजारों किलोमीटर के लिए निकलते देखे गए। रात में बारिश होने के बावजूद यह भीड़ थमी नहीं। अभी तक बड़ी तादाद में ऐसे मजदूर पैदल ही दिल्ली से निकल चुके हैं। मजदूर लगातार घर जा रहे हैं।

कारखाने में ही रहते थे, निकाल दिया
कुछ मजदूरों का कहना है कि वह कारखाने में ही रहते थे, लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण के खौफ के बीच उनको कंपनी ने निकाल दिया गया। ऐसे में उनके पास रहने को भी कोई ठौर ठिकाना नहीं बचा। जिंदगी बचाने के लिए घरों की ओर निकल पड़े।
 
संक्रमण से बचाव को कोई एहतियात नहीं
जो भीड़ गांवों की ओर भाग रही है उसमें कुछ लोगों ने मास्क पहन रखे थे, लेकिन ज्यादातर के पास मास्क नहीं था। एक दूसरे से दूरी का भी कोई ख्याल नहीं रखा जा रहा था। बसों में भी भारी भीड़ थी। ऐसे में कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता था।

भीड़ में शामिल एक मजदूर ने बताया कि मैं दिल्ली में मजदूरी करता हूं। आज सुबह पैदल ही नोएडा पहुंचा हूं। बस का इंतजार कर रहे हैं। मुझे हरदोई जाना है। रजनीश ने कहा कि हम पूरे परिवार के साथ उन्नाव जा रहे हैं। पहले जाने के बारे में सोचा नहीं था। जब पता चला कि बसों की व्यवस्था हो जाएगी तो पूरे परिवार के साथ निकल पड़े ।  रमाकांत ने बताया कि मैं कन्नौज जा रहा हूं। नोएडा में रहता हूं। आजकल कोई काम नहीं है। इसलिए गांव जाने को निकल पड़ा हूं। बस का इंतजार है।

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