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सायबर आतंकवादः 'पड़ोसियों' ने हैक की 979 वेबसाइट
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 06 Oct 2016 11:36 AM IST
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भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक से बौखलाए पाकिस्तानी हैकरों ने सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की वेबसाइट हैक कर दहशतगर्दी का संदेश दिया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। पाक कई सालों से सायबर आतंकवाद फैला रहा है।
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इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रोद्योगिकी विभाग के पिछले साढ़े चार के आंकड़ों के मुताबिक पड़ोसी देशों के हैकरों ने भारत सरकार की 979 सरकारी वेबसाइट हैक हुई हैं। अमर उजाला को यह जानकारी आरटीआई के माध्यम से 23 अगस्त 2016 को मिली है।
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आरटीआई के माध्यम से विभाग से 2012 से 2016 (जून) तक सरकारी वेबसाइट हैक करने के संबंध में 4 अगस्त 2016 को जानकारी मांगी गई थी। इसके जवाब में सर्ट इन के सीपीआईओ अजय लकड़ा ने साल दर साल हैकिंग के संबंध में जानकारी दी।
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आरटीआई के जवाब में कहा गया है कि भारतीय आपात दल (सर्ट-इन) ने हैकिंग के संबध में शिकायत दर्ज करता है। हालांकि साल दर साल सरकारी वेबसाइट के हैंकिग की शिकायतें कम आई हैं।
वर्ष 2012 में सबसे ज्यादा 371 सरकारी विभागों की वेबसाइट हैक हुई है। इसके बाद वर्ष 2013 में 189, वर्ष 2014 में 155, वर्ष 2015 में वर्ष164 और 2016 (जून तक) के दौरान 100 सरकारी वेबसाइट हैक की गई।
आरटीआई के मुताबिक भारत के पड़ोसी देशों से सबसे ज्यादा हैकिंग होती है। पिछले साढ़े चार सालों में सबसे ज्यादा साइबर हमले पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन से हुए हैं। इसके अलावा अमेरिका, मध्यपूर्वी देश और यूरोप से भी साइबर स्पेस से भारतीय साइबर नेटवर्कों और प्रणालियों को भेदने के प्रयास किए जाते गए।
सायबर विशेषज्ञों का कहना है कि एनजीटी की वेबसाइट हैक करना सायबर टेररिज्म का हिस्सा है। क्योंकि हैकर हमारे देश के सायबर स्पेस में आकर दहशतगर्दी फैला रहे हैं।
गौरतलब है कि भारतीय आपात प्रतिक्रिया दल (सर्ट इन) इंटरनेट पर आने वाली दिक्क्तों, साइबर आतंकवाद और उससे बचाव, हैकिंग के मामले और इससे जुड़ी समस्या में मदद करने वाली भारत सरकार की संस्था है।
हजारों यूआरएल ब्लॉक
आरटीआई आवेदन में आतंकवादी और पोर्न वेबसाइट ब्लॉक करने के बारे में जानकारी भी मांगी गई थी। 5 अक्टूबर को दिए जवाब में मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2012 से 2016 तक कुल 10 हजार252 यूआरएल ब्लॉक की है। इनमें से कितने यूआरएल पोर्न और आतंकवाद से संबंधित हैं इस बारें में मंत्रालय ने अलग-अलग संख्या नहीं बताई है।