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लॉकडाउन के बाद बढ़े साइबर अपराधः एनसीआर के जालसाज नौकरी के नाम पर कर रहे ठगी
Mon, 10 Aug 2020 06:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 10 Aug 2020 06:12 AM IST
सार
- पश्चिमी यूपी व बिहार के अपराधी फर्जी वेबसाइट से कर रहे हैं ठगी
- दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध को लेकर पहली बार किया भौगोलिक वर्गीकरण
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साइबर क्राइम(सांकेतिक)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
एनसीआर के जालसाज नौकरी लगवाने के नाम पर और मेवात के अपराधी ओएलएक्स क्यूआर कोड के जरिए दिल्ली वालों की जेब से पैसे निकाल रहे हैं जबकि पूर्वी उत्तरप्रदेश व बिहार के अपराधी फर्जी व्यवसायिक वेबसाइटों के जरिये दिल्ली वालों को ठग रहे हैं। लॉकडाउन के बाद दिल्ली में साइबर अपराध बढ़ गया है।
दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने अमर उजाला के साथ बातचीत में इसकी पुष्टि की है। राजधानी में साइबर ठगी की हर रोज करीब 18 से 20 शिकायतें आ रहे हैं। एक्सर्टोशन के बजाय ऑनलाइन हरासमेंट के केसों में काफी बढ़ोत्तरी हुई है।
लॉकडाउन व उसके बाद दिल्ली में साइबर अपराध बढ़ा है। दिल्ली पुलिस ने पहली बार इसका भौगोलिक डाटा तैयार किया है। जिसके तहत यह पता लगाया गया है कि किस प्रदेश के जालसाज दिल्ली में किस तरह का साइबर अपराध कर रहे हैं।
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दिल्ली पुलिस आयुक्त ने बताया कि साइबर अपराध का जो ट्रेंड सामने आ रहा है उसके हिसाब से साइबर अपराध का भौगोलिक वर्गीकरण किया है कि किस राज्य के लोग किस तरह का साइबर अपराध कर रहे हैं। ट्रेंड के अनुसार मेवात क्षेत्र के जालसाज ओएलएक्स क्यूआर कोड के जरिए दिल्ली वालों की जेब से पैसे निकाल रहे हैं। इसके अलावा झारखंड व पश्चिमी बंगाल के अपराधी केवाईसी और यूपीआई जालसाजी कर ठगी कर रहे हैं। जबकि एनसीआर के ठग दिल्ली के लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठग रहे हैं।
उत्तरी राजस्थान के जालसाज सरकारी फर्जी वेबसाइट के जरिए ठगी कर रहे हैं। पश्चिमी उत्तरप्रदेश के जालसाज सोशल मीडिया के जरिए जैसे मौका लग जाए वैसी ही ठगी कर रहे हैं। पूर्वी उत्तरप्रदेश व बिहार के जालसाज फर्जी व्यवसायिक वेबसाइट बनाकर जालसाजी कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस का मानना है कि आनॅलाइन जालसाज के काफी नए-नए तरीके सामने भी आ रहे हैं।
लॉकडाउन के दौरान ऐसे की जा रही ठगी
ये तरीके भी आए सामने
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दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने अमर उजाला के साथ बातचीत में इसकी पुष्टि की है। राजधानी में साइबर ठगी की हर रोज करीब 18 से 20 शिकायतें आ रहे हैं। एक्सर्टोशन के बजाय ऑनलाइन हरासमेंट के केसों में काफी बढ़ोत्तरी हुई है।
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लॉकडाउन व उसके बाद दिल्ली में साइबर अपराध बढ़ा है। दिल्ली पुलिस ने पहली बार इसका भौगोलिक डाटा तैयार किया है। जिसके तहत यह पता लगाया गया है कि किस प्रदेश के जालसाज दिल्ली में किस तरह का साइबर अपराध कर रहे हैं।
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दिल्ली पुलिस आयुक्त ने बताया कि साइबर अपराध का जो ट्रेंड सामने आ रहा है उसके हिसाब से साइबर अपराध का भौगोलिक वर्गीकरण किया है कि किस राज्य के लोग किस तरह का साइबर अपराध कर रहे हैं। ट्रेंड के अनुसार मेवात क्षेत्र के जालसाज ओएलएक्स क्यूआर कोड के जरिए दिल्ली वालों की जेब से पैसे निकाल रहे हैं। इसके अलावा झारखंड व पश्चिमी बंगाल के अपराधी केवाईसी और यूपीआई जालसाजी कर ठगी कर रहे हैं। जबकि एनसीआर के ठग दिल्ली के लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठग रहे हैं।
उत्तरी राजस्थान के जालसाज सरकारी फर्जी वेबसाइट के जरिए ठगी कर रहे हैं। पश्चिमी उत्तरप्रदेश के जालसाज सोशल मीडिया के जरिए जैसे मौका लग जाए वैसी ही ठगी कर रहे हैं। पूर्वी उत्तरप्रदेश व बिहार के जालसाज फर्जी व्यवसायिक वेबसाइट बनाकर जालसाजी कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस का मानना है कि आनॅलाइन जालसाज के काफी नए-नए तरीके सामने भी आ रहे हैं।
लॉकडाउन के दौरान ऐसे की जा रही ठगी
- फर्जी शॉपिंग साइट और ई-कॉमर्स पोर्टल बनाकर की जा रही जालसाजी
- इंसानियत के लिए काम करने के नाम पर ठगी की जाने लगी।
- नौकरी दिलाने के विज्ञापन निकालकर ठगी
- सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर लोगों को सामान देने के नाम पर ठगी की जानी लगी।
ये तरीके भी आए सामने
- कोविड समाचार के नाम पर लिंक भेजकर ठगी।
- सरकारी वेबसाइट बनाकर लोगों से सहायता मांगने के नाम पर जालसाजी
- केयर फंड से बनाकर डोनेशन के नाम पर ठगी