कायम है हरियाणा में इस बढ़ते शहर का रुतबा
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हरियाणा की अघोषित आर्थिक राजधानी गुड़गांव का रुतबा आज भी कायम है। प्रति व्यक्ति आय मामले में गुड़गांव प्रदेश का सबसे अव्वल जिला है। यहां प्रति व्यक्ति आय इस समय चार लाख 46 हजार 305 रुपये है। यहां भरपूर विकास हुआ है।
मगर गुड़गांस से सटे मेवात की स्थिति इससे बिल्कुल उलट है। जब से मेवात बना है तब से यहां कोई खास विकास नहीं हुआ है। यही कारण है कि प्रति व्यक्ति आय मामले में यह हरियाणा का सबसे पिछड़ा जिला है। यहां प्रति व्यक्ति आय 45,934 रुपये है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सोमवार को श्वेतपत्र जारी किया है। इसमें गुड़गांव की आर्थिक समृद्धि की तस्वीर को पेश किया गया है। हरियाणा की सरकारों की ओर से गुड़गांव को विकास के आईने के तौर पर पेश किया जाता रहा है।
यहां के उद्योग, यहां के कॉरपोरेट कार्यालय, मेट्रो, रैपिड मेट्रो और मॉल्स इसके विकास और आधुनिकता की कहानी स्वयं बयां करते हैं। बिना गुड़गांव का नाम आए हरियाणा के विकास की बात करना नाकाफी है। अक्सर लोग यह भी आरोप लगाते हैं कि गुड़गांव की ओर से सरकारें अधिक ध्यान देती हैं।
60 फीसद राजस्व मिलता है इस शहर से
गुड़गांव से हरियाणा सरकार को तकरीबन 60 प्रतिशत राजस्व मिलता है। मगर इसके विकास पर इसका काफी कम हिस्सा इसके ऊपर खर्च होता है। इस मामले को लेकर भी लगातार राजनीतिक हलकों में चर्चा होती रहती है। चुनावों में राजनीतिक दलों का यह मुद्दा भी रहा है।
गुड़गांव लगातार विकास के पथ पर अग्रसर है। वर्ष 2004-05 में गुड़गांव में प्रति व्यक्ति आय महज 81 हजार 478 रुपये थी वहीं वर्ष 2011-2012 में यह बढ़कर चार लाख 46 हजार, 305 रुपये हो गई है। हरियाणा सरकार ने अपने श्वेतपत्र में इस बात का जिक्र किया है कि पिछली सरकार ने 10 वर्षों में विकास के तीन स्तर पर काम किया।
पहला गुड़गांव-फरीदाबाद, दूसरे स्तर पर जीटी रोड से लगने वाले जिले जबकि तीसरा पश्चिमी हरियाणा। इन तीनों में विकास कार्यों को लेकर काफी असमानताएं हैं। इसे दूसर करने का प्रयास किया जाएगा। प्रदेश के सभी क्षेत्रों का समान विकास कराया जाएगा।